कांवड़ मेले में महिला स्वयं सहायता समूहों को 40 लाख की आमदनी, 59 स्टॉल बने रोजगार का माध्यम

कांवड़ मेले में महिला स्वयं सहायता समूहों को 40 लाख की आमदनी, 59 स्टॉल बने रोजगार का माध्यम

शहजाद अली

हरिद्वार

शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ कांवड़ मेला जहां श्रद्धालुओं के लिए भक्ति और आस्था का पर्व रहा, वहीं दूसरी ओर यह महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का अवसर भी बन गया।

मेले में 18 स्वयं सहायता समूहों ने कुल 59 स्टॉल लगाए थे, जिनमें तैयार किए गए स्थानीय उत्पादों की जमकर बिक्री हुई। सिर्फ 11 दिनों की अवधि में समूहों को 40 लाख रुपये की आमदनी हुई है, जिससे महिलाएं और संबंधित अधिकारी खासी संतुष्ट हैं।

महिलाओं के उत्पादों को मिली पहचान

इन स्टॉलों में हस्तशिल्प, जैविक उत्पाद, स्थानीय खानपान की सामग्री, सजावटी वस्तुएं और उपयोगी घरेलू सामान बेचे गए, जिन्हें कांवड़ियों और स्थानीय लोगों ने खूब सराहा।

बेहतर योजना से मिला लाभ

मुख्य विकास अधिकारी (CDO) ने जानकारी दी कि महिला समूहों के स्टॉल कांवड़ मार्ग और मेले के मुख्य स्थानों पर योजनाबद्ध ढंग से लगाए गए थे, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु वहां तक पहुंच सकें। इससे न केवल बिक्री बढ़ी, बल्कि महिलाओं के उत्पादों को सीधी बाजार पहुंच भी मिली।

महिलाओं का उत्साह

बेहतर आमदनी से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आत्मविश्वास से भरपूर हैं और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों में भागीदारी के लिए तैयार हैं।

एक महिला सदस्य ने कहा, “पहली बार लगा कि हमारी मेहनत की कद्र हो रही है, और हम भी अपने परिवार को आर्थिक रूप से सहयोग दे सकती हैं।”

निष्कर्ष:

कांवड़ मेला 2025 हरिद्वार में आस्था, प्रबंधन और महिला सशक्तिकरण का आदर्श उदाहरण बनकर उभरा है। महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी से यह साफ हो गया है कि अगर उचित मंच और अवसर मिले तो ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त कदम बढ़ा सकती हैं।