

रिपोर्टर : शहजाद अली
स्थान : हरिद्वार


ग्राम पदार्था उर्फ धनपुरा (क्षेत्र घिस्सुपुरा) स्थित ऐतिहासिक दरगाह हज़रत सैय्यद बाबा मंसूर अली शाह पर प्रशासन द्वारा अतिक्रमण का आरोप लगाए जाने पर क्षेत्रीय ग्रामीणों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ग्रामीणों का कहना है कि दरगाह पूरी तरह वैध है और विवाद खसरा नंबर की गलत व्याख्या का परिणाम है।



प्रशासन ने हाल ही में दरगाह को खसरा संख्या 234, जो कि जोहड़ (तालाब) के रूप में दर्ज है, पर स्थित बताकर अतिक्रमण की कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किया था। वहीं, ग्रामीणों का दावा है कि दरगाह खसरा संख्या 231 में स्थित है, जो कब्रिस्तान की भूमि है और उत्तराखंड वक्फ बोर्ड में UKHD3305 के अंतर्गत विधिवत पंजीकृत है।



पूर्व में भी मिली थी मान्यता

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि पूर्व में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा कब्रिस्तान की चारदीवारी निर्माण के दौरान दरगाह की उपस्थिति को मान्यता दी जा चुकी है, ऐसे में इसे अवैध ठहराना न केवल भ्रामक है, बल्कि धार्मिक भावनाओं को भी आहत करता है।


ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन, निष्पक्ष जांच की मांग

गुरुवार को स्थानीय ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल एसडीएम हरिद्वार से मिला और उन्हें ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिसमें वक्फ बोर्ड, राजस्व विभाग और ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। साथ ही यह भी सवाल उठाया कि वक्फ संपत्ति पर कार्रवाई करने से पूर्व वक्फ बोर्ड से अनुमति क्यों नहीं ली गई?

शांतिपूर्ण विरोध की चेतावनी

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि बिना निष्पक्ष जांच के जबरन कार्रवाई की गई, तो वे लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीकों से विरोध जताएंगे और न्याय पाने के लिए कानूनी रास्ता भी अपनाएंगे।


मामला संवेदनशील, समाधान में चाहिए समझदारी


यह मामला धार्मिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील है। प्रशासन और संबंधित विभागों से अपेक्षा की जा रही है कि वे तथ्यों की गहराई से जांच करें और सभी पक्षों से संवाद कर समाधान निकालें, जिससे सामुदायिक सौहार्द बना रहे।



