कांवड़ यात्रा के बदलते स्वरूप पर संत समाज की चिंता, भक्ति की जगह दिखावा

कांवड़ यात्रा के बदलते स्वरूप पर संत समाज की चिंता, भक्ति की जगह दिखावा

टॉप :- हरिद्वार
संवाददाता :- मनोज कश्यप

श्रावण मास में जारी कांवड़ यात्रा को लेकर इस बार संत समाज की चिंता भी सामने आई है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री महंत रवींद्र पुरी महाराज ने यात्रा के बदलते स्वरूप पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे सनातन परंपरा से भटकाव बताया है।

“यह यात्रा सनातन धर्म की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में से एक है। पहले कांवड़ साधारण होती थी, जिसे श्रद्धालु कंधे पर रखकर भक्ति भाव से ले जाते थे। अब कांवड़ में भारी-भरकम डिज़ाइन, डीजे, स्पीकर और झांकियों जैसी चीज़ें जुड़ गई हैं, जिससे न केवल यात्रा का मूल उद्देश्य पीछे छूट रहा है बल्कि आम जनजीवन भी प्रभावित हो रहा है।”

भक्ति से अधिक बनती जा रही है प्रतियोगिता
महंत पुरी महाराज ने कहा कि अब कई लोग इस यात्रा को आध्यात्मिक साधना की जगह दिखावे और प्रतिस्पर्धा का माध्यम बना रहे हैं।

“कांवड़ में आवश्यकता से अधिक जल भरना न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि यह दूसरों के लिए भी असुविधाजनक बन जाता है।”

डीजे और स्पीकर संस्कृति पर सवाल
उन्होंने यात्रियों और प्रशासन से अपील की कि कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण, अनुशासित और पारंपरिक स्वरूप में ही संपन्न किया जाए।

“भक्ति में शोर की नहीं, श्रद्धा की आवश्यकता होती है।”



हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री और गौमुख से पवित्र गंगाजल लेकर अपने क्षेत्रों में स्थित शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं। यह यात्रा उत्तर भारत की सबसे बड़ी धार्मिक और सामाजिक घटनाओं में से एक मानी जाती है।

संत समाज का आग्रह:

  • कांवड़ यात्रा को उसका मूल धार्मिक स्वरूप लौटाया जाए
  • डीजे, स्पीकर, झांकी और स्टंट जैसी चीजों पर नियंत्रण लगाया जाए
  • प्रशासन, आयोजकों और श्रद्धालुओं को मिलकर अनुशासित यात्रा का माहौल बनाना चाहिए