पंचक के साये में कांवड़ यात्रा: 13 से 17 जुलाई तक नहीं उठेगी कांवड़, 18 जुलाई से बढ़ेगी भीड़

पंचक के साये में कांवड़ यात्रा: 13 से 17 जुलाई तक नहीं उठेगी कांवड़, 18 जुलाई से बढ़ेगी भीड़

लोकेशन – ऋषिकेश

संवाददाता – सागर रस्तोगी

13 जुलाई की शाम से पंचक शुरू हो गया है, जो 17 जुलाई तक चलेगा। पंचक काल में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत शास्त्रों के अनुसार वर्जित मानी जाती है, जिसमें कांवड़ यात्रा का शुभारंभ भी शामिल है। यही कारण है कि सावन माह के 11 जुलाई से शुरुआत के बावजूद अब तक कांवड़ियों की भीड़ सीमित दिखाई दे रही है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार पंचक एक खगोलीय घटना है, जो चंद्रमा की स्थिति और पांच विशेष नक्षत्रों (धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद और रेवती) के संयोग से बनती है। इस दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य, यात्रा, गृह प्रवेश या निर्माण कार्य की शुरुआत को वर्जित माना गया है।

हरिद्वार, ऋषिकेश और नीलकंठ जैसे प्रमुख कांवड़ पड़ावों पर फिलहाल अपेक्षाकृत कम श्रद्धालु नजर आ रहे हैं, लेकिन 18 जुलाई से भीड़ में लाखों की संख्या में इजाफे की उम्मीद जताई जा रही है।

ब्राह्मण समाज और धर्मगुरुओं का कहना है कि पंचक काल में कांवड़ उठाना अशुभ माना गया है। हालांकि लंबी दूरी से यात्रा करने वाले श्रद्धालु 11 जुलाई से ही अपनी कांवड़ यात्रा आरंभ कर चुके हैं। उनका मानना है कि यदि यात्रा पंचक शुरू होने से पहले आरंभ कर दी जाए, तो उस पर पंचक का प्रभाव नहीं पड़ता।

गौरतलब है कि कांवड़ यात्रा श्रावण मास में की जाने वाली एक विशेष धार्मिक यात्रा है, जिसमें शिवभक्त गंगाजल लेकर अपने क्षेत्र के शिव मंदिर में जलाभिषेक करते हैं। इस यात्रा का उद्देश्य केवल भक्ति नहीं, बल्कि अनुशासन और तप का परिचय भी होता है।

प्रशासन और पुलिस ने भी पंचक के मद्देनज़र इस समय कम भीड़ को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाओं की अंतिम तैयारियों को परखना शुरू कर दिया है, ताकि 18 जुलाई से संभावित श्रद्धालु संख्या में भारी इजाफे से पूर्व सारी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रहें।