खटीमा की दो ग्राम पंचायतों की आधी आबादी मतदान के अधिकार से वंचित, ग्रामीण बोले – “क्या हम भारत के नागरिक नहीं है

खटीमा की दो ग्राम पंचायतों की आधी आबादी मतदान के अधिकार से वंचित, ग्रामीण बोले – “क्या हम भारत के नागरिक नहीं है

स्थान- खटीमा उधम सिंह नगर

रिपोर्ट -अशोक सरकार

उत्तराखंड के सीमांत खटीमा विकासखंड से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ग्राम पंचायत मुंडली और उम्रखुर्द की आधी जनसंख्या को इस बार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में मतदान का अधिकार नहीं मिल पाया। हैरानी की बात यह है कि यही जनसंख्या पिछले नगर निकाय चुनावों में भी मतदान से वंचित रही थी

मामला क्या है?

सरकार द्वारा नगर पालिका खटीमा के क्षेत्र विस्तार के तहत ग्राम पंचायत मुंडली के लगभग 500 मतदाता और उम्रखुर्द के लगभग 700 मतदाता को नगर पालिका क्षेत्र में शामिल किया गया, लेकिन इन क्षेत्रों को न तो शहरी क्षेत्र के रूप में पूर्ण रूप से अधिसूचित किया गया और न ही ग्रामीण क्षेत्र में बनाए रखा गया। परिणामस्वरूप यह आबादी न तो नगर निकाय चुनावों में मतदान कर सकी, और न ही अब पंचायत चुनाव में।

ग्रामीणों का दर्द

एडवोकेट पूनम राणा, जो ग्राम सभा उम्रखुर्द की निवासी हैं, ने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा:

“हमें ऐसा लग रहा है जैसे हम भारत के नागरिक ही नहीं हैं। ना हमें वोट डालने का अधिकार मिल रहा है, ना कोई विकास हो रहा है, और अब तो प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भी हमें नहीं पता कि किस अधिकारी के पास जाएं।”

ग्रामीणों का कहना है कि:

  • वे वोटिंग अधिकार से वंचित हैं।
  • विकास कार्य पूरी तरह से ठप हो चुके हैं।
  • जन्म, मृत्यु प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है।

प्रशासन की सफाई

इस मुद्दे पर उप जिलाधिकारी खटीमा तुषार सैनी ने बताया कि

“पूर्व में तैनात एसडीएम द्वारा इस स्थिति पर रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। शासन का कहना है कि यह क्षेत्र शहरी क्षेत्र के मानकों पर खरा नहीं उतरता, इसलिए इसे नगर पालिका में पूर्ण रूप से सम्मिलित नहीं किया गया है।”

यह सवाल बना चुनौती

इस असमंजस की स्थिति में ग्रामीण न केवल अपने लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित हैं, बल्कि विकास कार्यों और सरकारी सुविधाओं से भी कटे हुए हैं। यह मामला प्रशासनिक असंतुलन और व्यवस्था की खामी की ओर इशारा करता है।

सवाल उठते हैं:

  • क्या सरकार इस विसंगति को समय रहते ठीक करेगी?
  • क्या प्रभावित ग्रामीणों को भविष्य में मतदान और मूलभूत अधिकार मिल पाएंगे?
  • और तब तक इन लोगों का जनप्रतिनिधित्व और विकास कैसे सुनिश्चित होगा?