पंचायत चुनाव को लेकर कांग्रेस की रणनीति तैयार, वरिष्ठ नेताओं की बैठक में तय किए गए दायित्व

पंचायत चुनाव को लेकर कांग्रेस की रणनीति तैयार, वरिष्ठ नेताओं की बैठक में तय किए गए दायित्व

देहरादून

सचिन कुमार

उत्तराखंड में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर कांग्रेस ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में आज देहरादून स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में पंचायत चुनाव को लेकर रणनीति बनाई गई और वर्तमान सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया गया।

बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और प्रवेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

कांग्रेस ने बनाई पंचायत चुनाव की रणनीति

प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि पार्टी पंचायत चुनाव को लेकर पूरी गंभीरता से काम कर रही है। बैठक में सभी वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, जिन्होंने अपने-अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने कहा, “हर नेता की अपनी क्षेत्रीय पकड़ और समझ है। हम उन क्षेत्रों में जिम्मेदारियों का बंटवारा कर योजनाबद्ध ढंग से काम करेंगे।”
बैठक में क्षेत्र प्रभारियों की नियुक्ति को लेकर भी चर्चा की गई।

हरीश रावत का भाजपा पर हमला

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्य सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि भाजपा सरकार दो चरणों में पंचायती चुनाव कराने की योजना बना रही है, और आरक्षण रोस्टर को शून्य घोषित कर फिर से तैयार करने की प्रक्रिया संविधान और सामाजिक न्याय के खिलाफ है।
उन्होंने कहा, “इस प्रक्रिया से कई वर्ग आरक्षण के लाभ से वंचित रह जाएंगे। यह एससी-एसटी और अन्य कमजोर वर्गों के हितों पर सीधा हमला है। कांग्रेस इसकी कड़ी निंदा करती है।”

यशपाल आर्य ने पंचायत राज की समाप्ति का लगाया आरोप

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि भाजपा सरकार पंचायत राज की संवैधानिक अवधारणा को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा,
“आज पंचायत राज अधिनियम को खत्म करने की साजिश चल रही है। आरक्षण व्यवस्था को समाप्त किया जा रहा है। जब कोई प्रतिनिधि न्यायालय में याचिका दायर करता है, तो सरकार कहती है कि तीन दिन में जवाब देंगे और तुरंत अधिसूचना जारी कर दी जाती है। इससे स्पष्ट होता है कि भाजपा को संविधान पर कोई विश्वास नहीं है।”

निष्कर्ष

कांग्रेस पार्टी की यह बैठक स्पष्ट संकेत देती है कि वह पंचायत चुनाव को लेकर पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है। वहीं भाजपा सरकार की चुनावी प्रक्रिया और आरक्षण नीति को लेकर कांग्रेस का रुख आक्रामक है। आने वाले दिनों में कांग्रेस गांव-गांव पहुंचकर लोगों को सरकार की नीतियों से अवगत कराने और वैकल्पिक नेतृत्व देने की दिशा में सक्रिय अभियान चलाने की योजना बना रही है।