


स्थान : लोहाघाट (चंपावत)
रिपोर्ट : लक्ष्मण बिष्ट


चंपावत जिले में आलू की खेती को किसानों की आर्थिक रीढ़ माना जाता है, लेकिन इस बार आलू की फसल ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। किसानों ने उद्यान विभाग पर घटिया बीज उपलब्ध कराने का गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासन से जांच की मांग की है।


चंपावत व लोहाघाट क्षेत्र के किसान इस बार उद्यान विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए बीज से आलू की खेती कर रहे थे। बीज को प्रमाणिक मानते हुए किसानों ने हजारों रुपये खर्च कर बुवाई की, लेकिन फसल की खुदाई के दौरान उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ा।


“पौधों में आलू के दाने ही नहीं बैठे” — किसान नेता

पूर्व जिला किसान संगठन अध्यक्ष नवीन करायत ने कहा कि किसानों ने विभाग से ₹1000 प्रति कट्टा की दर से बीज खरीदा। “जिस खेत से पहले 50 किलो आलू निकलता था, वहां अब 10 किलो भी नहीं निकला,” उन्होंने बताया। करायत ने कहा कि कई खेतों में तो आलू के दाने ही नहीं बने, जिससे किसानों को बीज की लागत भी नहीं निकल पाई।


निजी संस्थानों के बीज से हुई बेहतर फसल
किसानों का कहना है कि निजी संस्थानों से खरीदे गए बीजों से अच्छी पैदावार हुई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उद्यान विभाग द्वारा वितरित बीज की गुणवत्ता बेहद खराब थी। करायत ने यह भी आरोप लगाया कि विभाग न केवल आलू बल्कि अन्य बीज और सामान भी निम्न गुणवत्ता का उपलब्ध करा रहा है, जिससे क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति और बिगड़ रही है।

प्रशासन से जांच की मांग, विभाग से संपर्क नहीं
किसानों ने इस पूरे मामले की जांच की मांग की है और मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। वहीं, उद्यान विभाग के अधिकारियों से संपर्क नहीं हो पाया, जिससे उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।


मंडी में नहीं मिल रहा उचित मूल्य
किसानों की परेशानी यहीं खत्म नहीं होती। जिन किसानों की फसल कुछ हद तक ठीक रही, उन्हें भी बाजार में उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। इससे किसानों में निराशा और आक्रोश लगातार बढ़ रहा है।



फसल चौपट, लागत डूबी, मंडी में दाम नहीं — चंपावत का किसान करें तो क्या करें?
किसानों की इस समस्या को लेकर अब क्षेत्र में कृषि नीति और विभागीय जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन को इस मामले पर शीघ्र कार्रवाई करनी होगी ताकि भविष्य में किसानों की मेहनत और पूंजी बर्बाद न हो।


