


संजय जोशी
रानीखेत

पवित्रता, कुर्बानी और भाईचारे के पैग़ाम के साथ शुक्रवार को रानीखेत की ऐतिहासिक जमा मस्जिद में ईद-उल-अज़हा (बकरा ईद) की नमाज़ अदा की गई। नमाज़ की इमामत लईक अहमद ने की।



नमाज़ के बाद मस्जिद परिसर “ईद मुबारक” की मुबारकबादों और गले मिलते लोगों की रौनक से जगमगा उठा।



बकरा ईद इस्लाम धर्म का एक पाक और अज़ीम दिन है, जो हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) द्वारा अल्लाह के हुक्म पर दी गई कुर्बानी की याद दिलाता है। यह दिन हमें यह सिखाता है कि सच्चा ईमान केवल रस्मों तक सीमित नहीं, बल्कि त्याग, इंसानियत और अल्लाह की राह में समर्पण में है।



नमाज़ के बाद इमाम साहब ने देश की तरक्की, अमन-ओ-सुकून, भाईचारे और इंसानियत की सलामती के लिए दुआ कराई। हर दिल से एक ही सदा उठी— “या अल्लाह! इस मुल्क को हमेशा महफूज़ और एकता से भरपूर रख।”

इस मौके पर मस्जिद परिसर में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग मौजूद रहे, जिनमें मो० अफ़ज़ल, सोनू सिद्दीकी, जुबैद अहमद, शकील अहमद, मो० ईशान, मो० शाहनवाज़, नईम खान, मो० फहीम, मो० अरबाज़, मो० मोईन, मो० मुर्तज़ा, मो० ज़ीशान, मो० उस्मान, समद सिद्दीकी, मो० सुलेमान, मो० दानिश, मुन्नवर अली, अमन शेख़, शाकिर खान, मो० आमिल, मो० शादाब सहित अनेक लोग शामिल हुए।


मस्जिद में सुरक्षा और व्यवस्था की दृष्टि से प्रशासन की ओर से पर्याप्त इंतज़ाम किए गए थे। इस मौके पर शहर में सौहार्द और भाईचारे का बेहतरीन नज़ारा देखने को मिला।



