सितारगंज में अक़ीदत और सादगी के साथ अदा की गई ईद-उल-अजहा की नमाज, अमन और भाईचारे की दुआएं

सितारगंज में अक़ीदत और सादगी के साथ अदा की गई ईद-उल-अजहा की नमाज, अमन और भाईचारे की दुआएं

स्थान-सितारगंज।

रिपोर्टर-तनवीर आंसरी

सितारगंज शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की ईदगाहों में शनिवार को ईद-उल-अजहा की नमाज बड़े अक़ीदत और सादगी के साथ अदा की गई।

नमाज के बाद उलेमाओं ने देश की सलामती, अमन-चैन और सीमाओं की रक्षा में लगे जवानों की लंबी उम्र के लिए दुआएं कीं।

ईदगाह में नमाज के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी और भाईचारे का संदेश दिया।

पूरे इलाके में त्यौहार को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला, लेकिन इसके साथ ही नमाजियों ने संयम और शांति का परिचय भी दिया।

क्या है ईद-उल-अजहा का महत्व?
ईद-उल-अजहा इस्लामिक कैलेंडर के 12वें महीने ‘जिलहिज्जा’ की 10 तारीख को मनाई जाती है। इसे बकरीद या कुर्बानी की ईद भी कहा जाता है। इस दिन मुसलमान अल्लाह के प्रति अपनी आस्था दिखाने के लिए विशेष नमाज अदा करते हैं और पैगंबर हज़रत इब्राहीम (अ.स.) की कुर्बानी की परंपरा को निभाते हुए जानवर की कुर्बानी देते हैं। इससे पहले नए कपड़े पहनकर ईदगाह या मस्जिदों में नमाज पढ़ी जाती है।

इस मौके पर शहर में शांतिपूर्ण माहौल रहा और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी ईदगाहों का दौरा कर व्यवस्था का जायज़ा लिया।