


हरिद्वार, 2 जून।
अर्धकुंभ मेला 2027 की तैयारियों में जहां एक ओर अधिकारी युद्धस्तर पर जुटे हैं और सैकड़ों करोड़ की योजनाएं बनाई जा रही हैं, वहीं 2021 के कुंभ मेले में करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए आस्था पथ की हालत आज बदहाल और लावारिस हो चुकी है।



कुंभ 2021 के दौरान करीब 20 करोड़ की लागत से नीलधारा के किनारे बना लगभग 1 किलोमीटर लंबा आस्था पथ कभी धार्मिक, आध्यात्मिक और पर्यटन दृष्टि से एक प्रमुख आकर्षण था। इसमें सुंदर वॉकिंग ट्रैक, सत्संग भवन, मेडिटेशन पॉइंट, और धार्मिक संगीत से युक्त साउंड सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं जोड़ी गई थीं।




लेकिन आज स्थिति यह है कि आस्था पथ पूरी तरह से खस्ताहाल हो चुका है। कई उपकरण चोरी हो चुके हैं, साउंड सिस्टम क्षतिग्रस्त है और असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण के बाद कभी भी इसकी देखरेख नहीं हुई।

आस्था पथ का निर्माण 2021 में सिंचाई विभाग द्वारा कराया गया था। योजना थी कि इसके बाद इसे हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) को सौंपा जाएगा। हालांकि विभागीय पत्राचार तो हुआ, लेकिन जवाबदेही का अभाव रहा। किसी भी विभाग ने इसके रखरखाव की जिम्मेदारी नहीं ली।


सरकारी धन के दुरुपयोग का उदाहरण
सरकार की इस बहुप्रचारित योजना का हाल आज सरकारी पैसे की बंदरबांट और उपेक्षा का प्रतीक बन चुका है। अब एक बार फिर आगामी अर्धकुंभ मेले में इसकी मरम्मत और सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने की योजना है।


स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि हर बार ऐसी योजनाएं सिर्फ आयोजनों के नाम पर बनाई जाएंगी और फिर उन्हें लावारिस छोड़ दिया जाएगा, तो यह जनता की गाढ़ी कमाई का सीधा दुरुपयोग है।


क्या फिर से लौटेगी आस्था?
अब सवाल उठता है कि क्या अर्धकुंभ 2027 में आस्था पथ को पुनर्जीवित किया जाएगा या यह फिर से सिर्फ बजट की खानापूरी बनकर रह जाएगा?


जनता को उम्मीद है कि इस बार सरकार और प्रशासन पूर्व की गलतियों से सबक लेगा और स्थायी योजनाओं का दीर्घकालिक प्रबंधन सुनिश्चित करेगा, जिससे हरिद्वार की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण हो सके।



