प्रकाश पपनै की तीन दिवसीय एकल कला प्रदर्शनी का समापन, कला संगोष्ठी में सृजनात्मकता पर हुआ संवाद

प्रकाश पपनै की तीन दिवसीय एकल कला प्रदर्शनी का समापन, कला संगोष्ठी में सृजनात्मकता पर हुआ संवाद

रानीखेत

संजय जोशी

मिशन इंटर कॉलेज सभागार में आयोजित तीन दिवसीय एकल कला प्रदर्शनी का समापन एक विचारपूर्ण कला संगोष्ठी के साथ हुआ। प्रदर्शनी के चित्रकार प्रकाश पपनै की कलाकृतियों ने दर्शकों को न केवल सौंदर्य का अनुभव कराया, बल्कि गहरी संवेदनाओं को भी झकझोरा। संगोष्ठी में वक्ताओं ने शहर में सृजनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर बल दिया।

चित्रकार प्रकाश पपनै ने कहा, “दर्शक किसी भी कला प्रदर्शनी की आत्मा होते हैं। कलाकार की अभिव्यक्ति तभी सार्थक बनती है जब दर्शक उसकी कला को समझें और प्रतिक्रिया दें। कला और दर्शक के बीच का यह संबंध ही किसी कलाकृति को प्रभावशाली बनाता है।”

लखनऊ से आए प्रसिद्ध चित्रकार खुर्रम अमीर ने कहा, “कलाकार अपनी संवेदना और करुणा से एक गहरे अर्थ को जन्म देता है, जो दर्शकों के हृदय को छूता है और उन्हें सोचने के लिए प्रेरित करता है। एक सच्चा कलाकार पहले एक बेहतर इंसान होता है।”

कार्यक्रम संयोजक विमल सती ने तीन दिवसीय प्रदर्शनी को अद्वितीय बताते हुए कहा कि भविष्य में भी रानीखेत में कला, साहित्य और संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि शहर में इस दिशा में जो खालीपन था, उसे अब काफी हद तक भर दिया गया है।

चित्रकार जीवन तिवारी ने प्रकाश पपनै के साथ की गई कला यात्राओं को याद करते हुए प्रदर्शनी को सफल बताया।

कला संगोष्ठी में दीपक पंत, चंद्रशेखर पपनै ने भी अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक जगदीश उपाध्याय ने किया।

समापन समारोह में संगीत और कला प्रेमियों की भी उपस्थिति रही, जिनमें गायक कौशल सती, गौरव तिवारी, गौरव भट्ट, सुनीता डावर, सोनम, भुवन साह, निकेत जोशी, शिक्षक दीपचंद्र पांडे, मनोज जोशी, विनय पपनै सहित अनेक कला प्रेमी मौजूद रहे।