

टॉप – हरिद्वार
संवाददाता – मनोज कश्यप

शराब निर्माता कंपनी रेडीको खेतान द्वारा हाल ही में बाजार में उतारी गई प्रीमियम व्हिस्की ‘त्रिकाल’ को लेकर संत समाज में गहरा रोष व्याप्त है। संतों का कहना है कि ‘त्रिकाल’ शब्द सनातन धर्म का पवित्र और आध्यात्मिक प्रतीक है, जिसका उपयोग किसी मादक पदार्थ के ब्रांड नाम के रूप में किया जाना अत्यंत आपत्तिजनक और निंदनीय है।



इस मुद्दे पर तीर्थ पुरोहित उज्ज्वल पंडित ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा, “त्रिकाल शब्द ब्रह्मांड के तीनों काल — भूत, भविष्य और वर्तमान — से जुड़ा है और यह हमारी धार्मिक मान्यताओं का अभिन्न हिस्सा है। इसे शराब के नाम से जोड़ना हमारी आस्था का अपमान है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”



संत समाज ने दी आंदोलन की चेतावनी
पंडित उज्ज्वल ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कंपनी ने तुरंत इस प्रोडक्ट का नाम नहीं बदला, तो संत समाज उग्र आंदोलन करेगा और सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगा।



उन्होंने सभी उत्पादक कंपनियों से अपील की कि वे धार्मिक प्रतीकों और शब्दों की गरिमा बनाए रखें और इस प्रकार के व्यावसायिक प्रयोगों से बचें।

धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मामला
संतों का कहना है कि व्यावसायिक लाभ के लिए धार्मिक शब्दों का प्रयोग न केवल अमर्यादित है, बल्कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करता है।

इस मुद्दे पर कई संगठनों ने भी समर्थन जताते हुए कंपनी से माफ़ी मांगने और नाम बदलने की माँग की है।



