


रिपोर्ट : संजय कुंवर
स्थान : केशव प्रयाग (माणा) बद्रीनाथ


भारत के प्रथम ऋतु प्रवासी धार्मिक तीर्थाटन एवं पर्यटन ग्राम मणिभद्रपुर माणा में चल रहे केशव प्रयाग पुष्कर कुंभ 2025 में आस्था का अनुपम संगम देखने को मिल रहा है। 14 मई से प्रारंभ हुए इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन में अब तक करीब 60,000 से अधिक श्रद्धालु सरस्वती और अलकनंदा नदियों के पावन संगम पर पवित्र स्नान कर चुके हैं। यह संख्या निरंतर बढ़ रही है।


यह कुंभ वैष्णव संप्रदाय की परंपराओं पर आधारित है और विशेष रूप से दक्षिण भारत के श्रद्धालुओं द्वारा उत्साह से मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह आयोजन तब होता है जब गुरु ग्रह मिथुन राशि में प्रवेश करता है, जो हर 12 वर्षों में आता है। इस बार का कुंभ 14 से 26 मई 2025 तक आयोजित हो रहा है।


धार्मिक अनुष्ठानों का अद्वितीय समागम
संगम तट केशव प्रयाग पर श्रद्धालु भोर से ही भजन, कीर्तन, तर्पण, पिंडदान और यज्ञ में भाग ले रहे हैं। इन अनुष्ठानों का संचालन श्रद्धालुओं के साथ आए गुरु पुरोहितों द्वारा किया जा रहा है। मान्यता है कि यहां स्नान मोक्ष प्राप्ति का साधन है।



पौराणिक महत्व
केशव प्रयाग न केवल प्राकृतिक रूप से रमणीय है, बल्कि यह हिंदू पौराणिक कथाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि महर्षि वेदव्यास ने यहीं तप कर महाभारत की रचना की थी। रामानुजाचार्य और माधवाचार्य जैसे महान आचार्यों ने यहीं माता सरस्वती से ज्ञान प्राप्त किया। यही वह स्थल है जहां से पांडव स्वर्गारोहण के लिए रवाना हुए थे, इसलिए इसे स्वर्ग का द्वार भी कहा जाता है।

सुरक्षा और प्रबंधन
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए एसडीआरएफ, जल पुलिस, आईटीबीपी और स्थानीय पुलिस बल सुरक्षा व्यवस्था में पूरी तरह से मुस्तैद हैं। संकरे मार्गों पर जवान श्रद्धालुओं को संगम तक सुरक्षित पहुंचाने में सहयोग कर रहे हैं। जल स्तर पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है।


धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई
माणा गांव में इस धार्मिक आयोजन ने एक नई धार्मिक पर्यटन धारा को जन्म दिया है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या से गांव में रौनक और सांस्कृतिक चेतना का वातावरण बन गया है। स्थानीय लोग भी इस आयोजन को लेकर खासे उत्साहित हैं।



विशेष उल्लेख:
इस धार्मिक उत्सव ने उत्तराखंड को दक्षिण भारत से भी एक आध्यात्मिक सेतु से जोड़ दिया है, जहां संस्कृति, परंपरा और आस्था का अद्भुत मिलन हो रहा है।


