पांच साल बाद फिर शुरू होगी कैलास मानसरोवर यात्रा, ड्रा से होगा श्रद्धालुओं का चयन

पांच साल बाद फिर शुरू होगी कैलास मानसरोवर यात्रा, ड्रा से होगा श्रद्धालुओं का चयन

स्थान : नई दिल्ली

पांच वर्षों के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर श्रद्धालुओं के लिए कैलास मानसरोवर यात्रा शुरू होने जा रही है। कोविड महामारी और भारत-चीन सीमा विवाद के कारण वर्ष 2019 से बंद पड़ी यह यात्रा 2024 में पुनः प्रारंभ हो रही है।

विदेश मंत्रालय बुधवार को यात्रा के लिए कंप्यूटराइज्ड ड्रा निकालेगा, जो विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह की उपस्थिति में नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल भवन में आयोजित होगा। इस वर्ष जून-जुलाई के बीच आयोजित की जाने वाली यात्रा में कुल 15 दलों में 750 तीर्थयात्री भेजे जाएंगे। हर दल में 50 श्रद्धालु शामिल होंगे।

दो मार्गों से होगी यात्रा, उत्तराखंड से 5 जत्थे रवाना होंगे

विदेश मंत्रालय के अनुसार इस वर्ष 5 जत्थे उत्तराखंड के लिपूलेख मार्ग से और 10 जत्थे सिक्किम के नाथूला मार्ग से यात्रा करेंगे।

उत्तराखंड मार्ग की यात्रा दिल्ली से शुरू होकर टनकपुर, धारचूला, तवाघाट, गुंजी, नाभीढांग होते हुए तकलाकोट और दारचेन तक जाएगी। इस मार्ग का संचालन कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) करेगा। निगम के एमडी विनीत तोमर ने बताया कि ड्रा के बाद चयनित यात्रियों को निर्देश और जानकारी भेजी जाएगी।

यात्रा शुल्क में बढ़ोतरी

इस बार यात्रा शुल्क 56,000 रुपये निर्धारित किया गया है, जो कि 2019 में 35,000 रुपये था। बढ़ी हुई दरों के बावजूद तीर्थयात्रियों में उत्साह बना हुआ है और बड़ी संख्या में लोगों ने ऑनलाइन आवेदन किया है।

लिपूलेख हाईवे बहाल, तीर्थयात्रियों को राहत

इस बीच यात्रा के एक महत्वपूर्ण मार्ग धारचूला-लिपूलेख राष्ट्रीय राजमार्ग को भारी बारिश के बाद बंद होने के एक दिन बाद हल्के वाहनों के लिए खोल दिया गया है। सोमवार रात की बारिश के चलते तवाघाट से चार किलोमीटर पहले कूलागाड़ के पास भारी मलबा और बोल्डर सड़क पर गिर गए थे, जिससे रास्ता अवरुद्ध हो गया था।

एसडीएम मंजीत सिंह ने मौके पर पहुंचकर कार्यदायी संस्था को मलबा हटाने के निर्देश दिए। मंगलवार शाम तक मार्ग आंशिक रूप से खोल दिया गया, जिससे हल्के वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। मार्ग की यह बहाली यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बड़ी राहत है।

ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व

कैलास मानसरोवर यात्रा भारत-तिब्बत सीमा पर स्थित पवित्र कैलास पर्वत और मानसरोवर झील की यात्रा है, जो हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है।