लोहाघाट में पेयजल संकट गहराया, लोहावती नदी बनी गंदगी ढोने का माध्यम

लोहाघाट में पेयजल संकट गहराया, लोहावती नदी बनी गंदगी ढोने का माध्यम

स्थान:लोहाघाट( चंपावत)
रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट

चंपावत, 25 अप्रैल।
गर्मी के बढ़ते प्रकोप के साथ-साथ उत्तराखंड में पेयजल संकट ने भयावह रूप ले लिया है। प्रदेशभर में लोग सुबह-शाम पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं। इसी कड़ी में चंपावत जिले के लोहाघाट नगर में भी हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं। यहाँ भीषण पेयजल संकट ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है, और लोग दूषित पानी पीने को विवश हैं।

प्रसिद्ध फिल्म निर्माता राकेश मधुसूदन ने लोहाघाट नगर के जल संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “लोहाघाट की जनता स्वयं इस संकट के लिए जिम्मेदार है।” उन्होंने कहा कि लोगों ने अपने प्राकृतिक जल स्रोतों — जैसे नौल, धारें और नदियों — का संरक्षण नहीं किया। इसके साथ ही जंगलों का अंधाधुंध कटान भी जल संकट का एक बड़ा कारण बना है।

उन्होंने कहा कि कभी लोहाघाट की लोहावती नदी स्वच्छ और निर्मल जल की स्रोत हुआ करती थी, लेकिन आज यही नदी और उसकी सहायक नदियाँ नगर का कूड़ा-कचरा व मलमूत्र ढोने का माध्यम बन गई हैं। मधुसूदन ने कहा, “प्रकृति वही लौटाती है जो हम उसे देते हैं। जब हम लोहावती में गंदगी बहाते हैं, तो वही गंदगी हमारे घरों की नलियों से लौटकर आती है।”

उन्होंने आगे कहा कि बुजुर्गों द्वारा बनाए गए नौलों और धारों की स्वच्छता की अनदेखी की गई है, जिसके चलते वे या तो पूरी तरह सूख चुके हैं या सूखने की कगार पर हैं।

राकेश मधुसूदन ने चेतावनी दी कि अगर अब भी लोग नहीं जागे, तो वह दिन दूर नहीं जब लोहाघाट की पहचान — लोहावती नदी — सिर्फ इतिहास बनकर रह जाएगी और लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरसेंगे

उन्होंने सरकार से भी अपील की कि वह नदियों और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए गंभीर कदम उठाए। उन्होंने कहा कि नमामि गंगे और स्वच्छ भारत अभियान केवल कागज़ों तक सीमित न रहकर धरातल पर भी प्रभावी रूप से लागू होने चाहिए।