

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों से उत्साहित राहुल गांधी अब गुजरात में तीन दशक बाद सत्ता में वापसी की रणनीति के साथ मैदान में उतर चुके हैं। कांग्रेस अधिवेशन के तुरंत बाद राहुल ने गुजरात कांग्रेस कार्यकर्ताओं से खुली बातचीत की और साफ संकेत दिया कि राज्य इकाई में बड़े पैमाने पर संगठनात्मक फेरबदल होने जा रहे हैं।




गुजरात, जहां कांग्रेस पिछले कई चुनावों से सत्ता से बाहर है, वहां राहुल गांधी ने यह स्पष्ट किया कि अब पार्टी “परंपरागत राजनीति” से बाहर निकलकर “ज़मीनी स्तर की लड़ाई” लड़ेगी। हालांकि, पिछले चुनावी आंकड़े देखें तो मिशन गुजरात कांग्रेस के लिए आसान नहीं है। लेकिन राहुल की आक्रामकता से कांग्रेस के भीतर नई ऊर्जा महसूस की जा रही है।


दिल्ली-हरियाणा में ‘सोलो प्लान’, बिहार में भी दिखा सख्त रुख
लोकसभा चुनावों के नतीजों के बाद कांग्रेस ने अपनी गठबंधन रणनीति में भी बदलाव करना शुरू कर दिया है। पार्टी ने दिल्ली और हरियाणा में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला लिया है, जबकि झारखंड और महाराष्ट्र में गठबंधन रणनीति को बनाए रखा गया है।

दिल्ली में आप पार्टी के साथ गठबंधन की संभावनाएं नहीं बनीं, और अब बिहार में भी कांग्रेस के तेवर कुछ वैसे ही सख्त नजर आ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी अब अपने दम पर राजनीतिक ताकत दिखाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।


राहुल गांधी को मिला नतीजों से ‘मोरल बूस्ट’
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली सीटों और मत प्रतिशत में सुधार ने राहुल गांधी को एक नया राजनीतिक आत्मविश्वास दिया है। यही वजह है कि अब वह राज्यों में संगठनात्मक सुधार और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर काफी मुखर नजर आ रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि राहुल गांधी गुजरात जैसे कठिन राज्य में पार्टी को खड़ा करने में सफल हो जाते हैं, तो यह 2029 की तैयारी का बड़ा संकेत माना जाएगा।


