

रिपोर्टर नाम-: आसिफ इक़बाल
लोकेशन-: रामनगर

रामनगर (कॉर्बेट लैंडस्केप), सोमवार।
प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता के लिए विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट नेशनल पार्क से सटे कोसी नदी और आसपास के जलाशयों में अब एक बार फिर सन्नाटा पसरने लगा है। हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर सर्दियों में आने वाले प्रवासी पक्षी, अब गर्मियों की दस्तक के साथ ही अपने मूल निवास की ओर लौटने लगे हैं।



सितंबर-अक्टूबर के महीने में आने वाले यह पंखों वाले मेहमान, मार्च-अप्रैल के दौरान जैसे ही तापमान बढ़ता है, धीरे-धीरे वापसी की उड़ान भरने लगते हैं। अब जलाशयों में बहुत कम पक्षी बचे हैं, और जो हैं, वे भी जल्द ही लौट जाएंगे।

पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, ये प्रवासी पक्षी हर साल साइबेरिया, कजाकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, अफगानिस्तान, मध्य एशिया, उत्तरी यूरोप और चीन जैसे क्षेत्रों से सेंट्रल एशियन फ्लायवे (CAF) मार्ग से होते हुए भारत पहुंचते हैं। वे यहां की सर्द जलवायु, शांति और खाद्य संसाधनों के कारण कुछ महीने बिताते हैं और फिर प्रजनन पूरा कर गर्मियों से पहले लौट जाते हैं।



कॉर्बेट नेशनल पार्क और इसके आसपास का क्षेत्र न केवल बाघ, हाथी और गुलदारों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह 500 से अधिक पक्षी प्रजातियों का आश्रय स्थल भी है। इन पक्षियों में प्रमुख रूप से साइबेरियन क्रेन, ब्लैक स्टार्ट, वॉल कीपर, पिनटेल, करबोरेंच, और सुर्खाब (गोल्डन डक) जैसे सुंदर पक्षी शामिल हैं।

सुर्खाब, जिसे गोल्डन डक भी कहा जाता है, यहां आने वाले सबसे खास प्रवासी पक्षियों में गिनी जाती है। यह पक्षी हमेशा जोड़े में उड़ान भरता है, यहां प्रवास के दौरान प्रजनन करता है, और जब उसके बच्चे उड़ने लायक हो जाते हैं, तो पूरे परिवार के साथ लौट जाता है।



इस मौसमी यात्रा का दृश्य पक्षी प्रेमियों और पर्यटकों दोनों के लिए एक अलौकिक अनुभव होता है। अब जब ये मेहमान विदा ले चुके हैं, तो प्रकृति प्रेमी एक बार फिर अगली सर्दियों की प्रतीक्षा में हैं, जब कोसी नदी का किनारा फिर से चहचहाहटों से गुलजार होगा।



