

रिर्पोट:लक्ष्मण बिष्ट

स्थान:लोहाघाट

चंपावत जिले के बाराकोट ब्लॉक के तल्ला बापरू गांव की अनुसूचित जाति की एक गरीब विधवा महिला रेवती देवी पत्नी स्वर्गीय मोहन राम अपने छोटे-छोटे तीन बच्चों के साथ खंडहर हो चुके मकान में रहने को मजबूर है


पर सरकार व प्रशासन के द्वारा इस विधवा महिला की कोई खबर तक नहीं ली गई नाहीं महिला को किसी योजना का लाभ दिया गया महिला रोड़ी फोड़कर व मजदूरी कर अपने तीन बच्चों का पालन पोषण करती है


शनिवार को रेवती देवी ने बताया 2 वर्ष पूर्व आई आपदा में उनका भवन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था जिसकी सूचना प्रशासन को दी गई जिसके बाद राजस्व उप निरीक्षक ने मौके पर आकर मौका मुवायना भी किया

और मात्र ₹5000 मुआवजा देने की बात कही थी जो कि आज तक नहीं दिया गया रेवती देवी ने बताया उन्होंने कई जगह मदद की गुहार लगाई पर उनकी मदद न तो सरकार न प्रशासन और ना ही क्षेत्र के किसी जनप्रतिनिधि ने कि जो चुनाव के समय वोट के लिए बड़े-बड़े वादे कर जाते हैं रेवती देवी ने बताया

वह मेहनत मजदूरी कर अपने बच्चों को पाल रही है उन्होंने मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाते हुए उन्हें आवास देने की मांग की है उन्होंने कहा इस भवन में उनके परिवार को खतरा हो रहा है पर उनकी सुध किसी के द्वारा नहीं ली गई है वहीं क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता उमेश बिष्ट व ग्रामीण शंकर राम ने कहा सरकार अनुसूचित जाति के लोगों के लिए कई योजनाएं चलाती हैं पर हकीकत में जिन गरीब लोगों को योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए


उन्हें नहीं मिल पाता है उन्होंने मुख्यमंत्री से इस गरीब विधवा महिला व उनके छोटे बच्चों की मदद करने की गुहार लगाई है लोगों ने कहा यह सरासर प्रशासन की लापरवाही है जो गरीबों को इस तरह मरने को छोड़ दिया जाता है गरीबी के कारण महिला ने अपने दो बेटों को पढ़ने के लिए अपने भाई के घर छोड़ा है तथा एक छोटी बेटी उनके साथ रहती है तथा खतरे के साए में एक छोटी सी कोठरी में रहने को मजबूर है कुल मिलाकर सरकार तो योजना चलाती है पर अधिकारियों की हील हवाली के चलते योजनाओं का लाभ गरीब तबके को नहीं मिल पाता है

कुल मिलाकर गरीबों को सरकार द्वारा चलाई जा रही योजना का लाभ न मिलने पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधि ,सरकारी अधिकारी कसूरवार है जबकि भाजपा सरकार दावा करती है सरकार की योजना का लाभ अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को मिलेगा पर दावे तो दावे होते हैं मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेना चाहिए कि योजनाएं धरातल पर परवान चढ़ पा रही हैं या नहीं या सिर्फ कागजी खाना पूर्ति हो रही है अब देखना है सरकार व प्रशासन इस अनुसूचित जाति की गरीब विधवा महिला की मदद कर पाती है या नहीं


