फूलों की घाटी राष्ट्रीय पार्क

फूलों की घाटी राष्ट्रीय पार्क

रिपोटर संजय कूवर

स्थान जोशी मठ

विश्व धरोहर फूलो की घाटी राष्ट्रीय पार्क में इन दिनों उच्च हिमालई पुष्पों की रंगत बिखरी हुई है, खासकर रिवर ब्यूटी गुलाबी पुष्प एपलोवियम और नीला ब्लू पॉपी पुष्प,कैंपान्युला, जिरेनियम, देशी विदेशी सैलानियों को खूब आकर्षित कर रहा है। बता दें कि हिमालयन अल्पाइन फ्लावर्स क्वीन के रूप में प्रसिद्ध ब्लू पॉपी पुष्प जुलाई-अगस्त में हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी में सबसे अधिक खिला दिखाई देता है।

दरअसल यह फूल उत्तराखंड की फूलों की घाटी में चार दशक पहले जापान से आया है। इस खूबसूरत पुष्प को जापान से उत्तराखंड के इस भ्यूंडार घाटी में आने की स्टोरी भी लाजवाब है। वर्ष 1986 तक यह पुष्प घाटी में नजर ही नहीं आता था। इसी साल 1986 में जापान से एक युवा रिसर्च स्कॉलर “चो बकांबे” दुर्लभ पुष्पों पर रिसर्च करने के लिए उत्तराखंड आए, और इस दौरान उन्होंने घाटी में हिमालयन ब्लू पॉपी के बीज बिखेर दिए।

जब तीन साल बाद फिर उत्तराखंड की इस वादी में लौटे तो देखा कि फूलों की इस घाटी में ब्लू पॉपी के फूल अपनी नीली रंगत बिखेर रहे थे। दुनिया में इसकी 40 प्रजातियां मौजूद है। जिसमें से 20 भारत में ही पाई जाती हैं।