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रिपोटर – मोहन गिरी

स्थान -थराली

चमोली जनपद के दूरस्थ विधानसभा थराली के थराली और देवाल विकासखण्ड की हजारों की आबादी पर मोटरपुल के जीर्ण शीर्ण होने और इस मोटरपुल पर अवरुद्ध यातयात का प्रभाव साफ तौर पर देखा जा सकता है पिंडर घाटी की लाइफलाइन माने जाने वाले इस पुल का अस्तित्व खतरे में हैमोटरपुल जर्जर होने के बाद स्थानीय प्रशासन ने इसे छोटे बड़े सभी वाहनों के लिए प्रतिबंधित कर दिया है स्थानीय व्यापारी से लेकर थराली देवाल के कई गांवों के ग्रामीण इस पुल पर यातयात ठप होने से प्रभावित हुए हैं यात्रियों को लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी और कितने समय तक करनी पड़ेगी इसका जवाब अभी फिलहाल किसी के पास नहीं आइए एक नजर जानते हैं इस मोटरपुल के बारे में और ये जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर क्या वो कारण रहे जिनके चलते मोटरपुल जर्जर हालत में जा पहुंचा70 के दशक में थराली और देवाल को जोड़ने वाला ये मोटरपुल वर्ष 2013 की आपदा में भी क्षतिग्रस्त हुआ था तब पिंडर नदी के उफान से पुल का एक हिस्सा (abndend) बह गया था तब भी पुलों की जांच करने रुड़की से आई टीम ने पिंडर नदी पर बने 49 मीटर स्पान के इस b क्लास पुल को भविष्य के लिए असुरक्षित बताया था और इसका विकल्प तलाश करने की राय सुझाई थी लोक निर्माण विभाग के आला अधिकारियों ने भी राय पर मंथन करते हुए आनन फानन में पुल के पास औऱ पुल के ऊपर चेतावनी बोर्ड लगा दिया जिसमें वाहनों को निर्देशित किया गया कि पुल पर एक बार मे सिर्फ एक ही वाहन गुजारा जाए पुल की भार क्षमता 16.2टन और इस मोटरपुल पर 20 किमी प्रतिघन्टा की रफ्तार से अधिक न हो इसके लिए बाकायदा लोक निर्माण विभाग ने पुल के दोनों छोरो पर चेतावनी बोर्ड लगा दिए


लेकिन अब जरा थराली के मुख्य बाजार में लगे इस जाम के झाम को देखिए ,जाम की इन तस्वीरों को देखिए जहां पुल पर एक नहीं दो नहीं एक साथ कई वाहन खड़े हैं ,जो चेतवानी बोर्ड को मुंह चिढ़ा रहे थे जो पुल के जर्जर होने के पीछे की एक बड़ी वजह हो सकती हैवहीं खनन सामग्री लदे ओवरलोड डंपर अक्सर जाम की स्थिति में पुल पर खड़े हो जाते कई बार पुल पर ही ये ओवरलोड डंपर दूसरे वाहनों को पास भी देते जबकि पुल की भार क्षमता सिर्फ 16 .2 टन है और पुल पर एक बार मे इस क्षमता से कई गुना भर के डंपर खड़े होने से पुल की मियाद को खतरा हुआये बात लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं ने भी मानी है कि मोटरपुल पर क्षमता से अधिक भार पड़ रहा है जिसके चलते पुल को खतरा हो सकता है विभागीय अधिकारियों ने स्थानीय तहसील प्रशासन को भी बाकायदा पत्र लिखकर इससे अवगत कराया था लेकिन इस पत्र का संज्ञान ले लिया जाता और लोक निर्माण विभाग पुल जर्जर होने से दो दिन पहले इस पत्र को जारी करने की बजाय गहरी नींद से जगते हुए ओवरलोड डंपरों के चलने के पहले दिन से ही स्थानीय प्रशासन को ऐसा पत्र लिखकर अवगत करा चुका होता तो शायद थराली और देवाल की हजारों की आबादी को यूं प्रभावित न होना पड़तालोक निर्माण विभाग ने 23 जून को जारी पत्र में पुल को खतरा बताया था और 25 जून को पुल के मध्यभाग में वेयरिंग कोड धंस गया ,25 जून को लोक निर्माण विभाग ने कार्यालयी आदेश जारी करते हुए सुरक्षा की दृष्टि से मोटरपुल पर छोटे बड़े वाहनों को प्रतिबंधित करने का आदेश जारी किया वहीं इसी पत्र में विभागीय अधिकारियों ने रात्रि में मोटरपुल से ओवरलोड डंपरों के भारी मात्रा में गुजरने का भी हवाला दिया और मोटरपुल के जर्जर होने के पीछे ओवरलोड डंपरों को बड़ी वजह बतायाऐसे में कहा जा सकता है कि स्थानीय प्रशासन समय रहते ही अगर ओवरलोड डंपरों पर रोक लगा चुका होता

तो शायद पुल पर इस तरह सभी प्रकार के वाहनों को प्रतिबंधित करने की नोबत न आती और हजारों की आबादी प्रभावित भी न होती फिलहाल थराली के कतिपय गांवों का सम्पर्क तहसील मुख्यालय, विकासखण्ड मुख्यालय और अस्पताल से कट चुका है प्रसव की स्थिति में प्रसूता महिलाओं को या तो पैदल ही अस्पताल तक पहुंचना होगा या फिर 60 किमी की अतिरिक्त दूरी तय कर अस्पताल जाना होगा ,स्थानीय व्यापारियों के व्यापार पर भी इसका प्रभाव आने वाले दिनों में पड़ सकता है आखिर एक लापरवाही सब पर भारी पड़ी है और स्थानीय प्रशासन मोटरपुल की इस दुर्दशा के पीछे की वजह जानने के लिए रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है


