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रिपोटर -अज़हर मलिक

स्थान – काशीपुर

उत्तराखंड के काशीपुर की सड़कों पर इन दिनों मौत मंडरा रही है और इस मंडराती मौत के डर लोग डर के साए में जीने को मजबूर हैं लोगों ने अपने पालतू जानवरों को अब घर के अंदर कैद करना शुरू कर दिया, लोग अपने बचाव के लिए गुहार लगा रहे हैं लेकिन कोई भी जिम्मेदार उनकी गुहार सुनने के लिए तैयार नहीं क्या है पूरा मामला जाने हमारी इस खास रिपोर्ट जंगल की एक अपनी दुनिया और जंगल की दुनिया में बिग कैट फैमिली के 3 सदस्य टाइगर लेपर्ड और चीता जो अपनी दहशत से जंगलों पर राज करते हैं और जब यह शिकारी जानवर जंगलों को छोड़कर रिहायशी इलाकों में अपनी दस्तक देना शुरू कर दे तो लोग खौफ के साए में जीने को मजबूर हो जाते हैं। बिग कैट फैमिली का कोई सदस्य इंसान को उठाकर ले जाए कोई नहीं जानता, इसीलिए जंगली जानवरों और इंसानी जिंदगी के लिए कानून बनाया गया और इसकी हिफाजत की जिम्मेदारी वन विभाग के अधिकारियों को दी गई


लेकिन इन दिनों अधिकारियों की लापरवाही कहे या फिर नजर अंदाजी जंगली जानवरों की दस्तक लगभग 1 साल से अधिक लंबे समय से काशीपुर के द्रोण सागर पर स्थित एक टीले पर है। जो समय-समय पर होने अपने होने का एहसास भी करता रहता है। इंसानों के पालतू जानवरों को अपना शिकार बनाने से नहीं चूकते, लेकिन काशीपुर रेंजर की नजरों में ना तो इंसानों की जिंदगी की कोई कीमत है ना ही गुलदार की जिंदगी की कोई कीमत, क्योंकि काफी लंबे समय से काशीपुर में गुलदार की दस्तक है कब किस पर हमला कर दे कुछ कहा नहीं जा सकता, काशीपुर क्षेत्र में स्थित गुलदार इतने खूंखार हो चुके हैं कि आपस में एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए हैं बुधवार की सुबह ही एक गुलदार ने दूसरे गुलदार को मौत के घाट उतार दिया। इतनी घटनाएं होने के बाद भी काशीपुर के दफ्तर में बैठकर आराम फरमाते रहे है। ना ही गुलदारो को बचाने का कोई प्रयास किया जा रहा है नाही इंसानों को बचाने का कोई ठोस रणनीति तैयार की जा रही।: जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही से गुलदार ने आबादी वाले क्षेत्रों में दस्तक देनी शुरू कर दी

सड़क पर मंडारती मौत से बचने के लिए लोगों ने अपने आप को घरों में कैद करना शुरू कर दिया। ऐसे में देखने वाली बात होगी के सोए हुए अधिकारी क्या नींद से जागते हैं या फिर उच्च स्तरीय अधिकारी ऐसे लापरवाह कर्मचारियों पर कोई कठोर कार्यवाही करते हैं या नहीं


