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रिपोटर -राजू सहगल

स्थान -किच्छा

उधम सिंह नगर। जहां एक तरफ माननीय उच्च न्यायालय द्वारा प्रदेश में जेसीबी के माध्यम से खनन किए जाने पर पाबंदी लगाई गई है तथा उत्तराखंड सरकार द्वारा भी अवैध खनन पर अंकुश लगाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ किच्छा तहसील में कार्यरत पटवारी को अवैध खनन पर कार्यवाही करने की एवज में स्थानांतरण का इनाम दिए जाना चर्चा का विषय बन गया है। सीधे तौर पर कहा जाए तो अवैध खनन पर कार्यवाही करना क्षेत्रीय पटवारी को महंगा पड़ गया। खनन कारोबारियों की ऊंची पकड़ के चलते क्षेत्रीय पटवारी का किच्छा से जसपुर ट्रांसफर करने का मामला प्रकाश में आने के बाद चर्चा में है। गौरतलब है कि पुरानी गल्ला मंडी स्थित गोला नदी में पट्टे की आड़ में जेसीबी मशीनों के माध्यम से खुलेआम खनन किए जाने के खिलाफ ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मनोज कुमार सहित तमाम ग्रामीणों द्वारा कई बार विभागीय अधिकारियों को लिखित शिकायत कर कार्यवाही किए जाने की मांग की गई थी। लगातार मिल रही शिकायत के बाद तहसील प्रशासन की टीम ने विगत 20 अप्रैल को पुरानी गल्ला मंडी स्थित रपटा पुल के निकट गोला नदी में अवैध खनन पर औचक छापामार कार्यवाही करते हुए एक जेसीबी मशीन को कब्जे में लेकर सीज कर दिया।


इस दौरान खनन से जुड़े तमाम वाहन नदी एवं खेतों के रास्ते मौके से भागते नजर आए थे, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। कार्यवाही के दौरान विभागीय टीम ने एक जेसीबी मशीन को पकड़कर सीज कर दिया था जबकि खनन में लिप्त अन्य वाहन मौके से फरार हो गए थे। सूत्रों का कहना है कि राजस्व विभाग द्वारा की गई छापामार कार्यवाही खनन कारोबारियों को नागवार गुजरी और उन्होंने अपनी ऊंची पकड़ के चलते कार्यवाही के एक सप्ताह के भीतर ही क्षेत्रीय पटवारी का ट्रांसफर करवा दिया। जहां एक तरफ उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा जेसीबी से खनन किए जाने पर पूरी तरह से पाबंदी के बावजूद किच्छा क्षेत्र में रपटा पुल के निकट जेसीबी मशीनों से खुलेआम अवैध खनन किया जा रहा था उससे साफ प्रतीत हो रहा है कि कुछ वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा सत्ता पक्ष के एक बड़े नेता के इशारे पर खनन के अवैध कारोबार को खुलेआम अंजाम दिया जा रहा है। विगत दिनों राजस्व विभाग द्वारा की गई औचक छापा मार कार्यवाही से खनन व्यवसाई के शासन और सत्ता में बैठे शुभचिंतकों ने अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना दिया और राजस्व टीम में शामिल क्षेत्रीय पटवारी का एकाएक किच्छा तहसील से जसपुर तहसील में ट्रांसफर कर दिया गया। सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर अवैध खनन के खिलाफ कार्यवाही करने वाले इस पटवारी का ट्रांसफर प्रशासन के किस बड़े अधिकारी और राजनेता के इशारे पर किया गया है ? पटवारी का ट्रांसफर होने के साथ ही इस बात पर भी मोहर लगती नजर आ रही है कि खनन व्यवसाई के हौसले बुलंद हैं और अपने आकाओं की मजबूत पकड़ और शासन सत्ता के रसूखदारों के दम पर अवैध खनन से जुड़े माफिया खुलेआम अपना झंडा बुलंद किए हुए हैं। वहीं दूसरी तरफ ट्रांसफर की कार्यवाही होने के बाद राजस्व विभाग के कर्मचारियों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया है

और सभी कर्मचारी इस मामले से अपना पल्ला छुड़ाते नजर आ रहे हैं। जहां एक तरफ माननीय उच्च न्यायालय द्वारा जेसीबी मशीनों से अवैध खनन पर पाबंदी के निर्देश दिए गए हैं वहीं दूसरी तरफ प्रदेश सरकार द्वारा भी समय-समय पर अवैध खनन पर रोक लगाने के दावे किए जाते हैं लेकिन किच्छा क्षेत्र में उच्च न्यायालय के निर्देश तथा प्रदेश सरकारों सरकार के दावों की खुलेआम पोल खुल रही है।


