गुमदेस मे ढोल नगाड़ों के बीच निकली चमू देवता की रथयात्रा हजारों लोगों ने लिया आशीर्वाद

गुमदेस मे ढोल नगाड़ों के बीच निकली चमू देवता की रथयात्रा हजारों लोगों ने लिया आशीर्वाद

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रिपोटर -लक्ष्मण बिष्ट

स्थान -लोहाघाट

लोहाघाट ब्लॉक के नेपाल सीमा से लगे गुमदेश क्षेत्र का ऐतिहासिक चैतोला मेले में आज खराब मौसम के बीच मडगांव से ढोल नगाड़ों के साथ चमु देवता की भव्य रथ यात्रा निकाली गई भक्तों ने चमू देवता के रथ को रस्सों के सहारे खींच कर उबर खाबर व चढ़ाई भरे रास्तों को पार कर चमु देवता मंदिर तक पहुंचाया जहां रथ ने चमू देवता मंदिर की परिक्रमा करी रथ के पीछे महिलाएं चमू देवता की वीर गाथा गाती हुई चल रही थी। रथ यात्रा में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए सवेरे से ही चमु देवता मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ रही पूजा पाठ के लिए देश-विदेश से भक्त चमू देवता का आशीर्वाद लेने गुमदेश पहुंचे हुए थे वही शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पंचेश्वर कोतवाली के एसएचओ इंद्रजीत दल बल के साथ डटे रहे वहीं मेले में दूर-दूर क्षेत्रों से आए व्यापारियों ने अपनी दुकानें सजा रखी थी महाभारत कालीन इतिहास को संजोए चैतोला मेला द्रोपद कालीन इतिहास की जीती जागती मिसाल है।

मंदिर कमेटी अध्यक्ष हरक सिंह भंडारी, पंडित मदन कॉलोनी व पंडित शंकर दत्त पांडे ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान किया था।  इसी मंदिर में प्रतिवर्ष चैत्र नवरात्र को प्रसिद्ध चैतोला मेले का आयोजन होता है। तीन दिनों तक चलने वाले इस मेले कि मान्यता है कि श्रद्धा भाव से मांगी गई हर मुराद चमू देवता पूरी करते हैं।उन्होंने कहा मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण अज्ञातवास के दौरान  पांडवों ने किया था। मंदिर के अन्दर शिवलिंग व दीवारों पर विराजमान पांडव कालीन मूर्तियां इसका प्रमाण हैं। कहा जाता है कि तत्कालीन समय में शक्तिशाली दैत्य बकासुर ने क्षेत्र में आतंक मचाया हुआ था, जो बारी-बारी से क्षेत्र के लोगों को मारकर खा जाता था जिससे परेशान एक वृद्ध महिला कोकिला ने दैत्य के आतंक से कुल नाश की आशंका को देखते हुए चमू देवता से दैत्य से रक्षा करने की गुहार लगाई थी। भक्त की कर्ण पुकार सुन कर चमू देवता ने लाटा भराड़ा और रुद्र की सहायता से बकासुर का वध कर क्षेत्रवासियों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी। तब से यहां प्रतिवर्ष लोग उत्सव में चैत्र नवरात्रि में मेले का आयोजन करते आ रहे हैं, जिसे चैतोला मेले के नाम से जाना जाता है। क्षेत्र के लोग चमू देवता के वीरता का बखान लोकगीतों के माध्यम से करते हैं

-लाठी डंडों से लैस होकर लोग जत्थों में लाठी डंडों के साथ वीर सैनिक की वेशभूषा में जयकारों के साथ चलते हैं। नेपाल सीमा से लगे गावों का यह सबसे बडा मेला है। यहाँ चावल का बना पापड़ प्रसाद के रूप में मिलता है  तथा कल तीसरे दिन यहाँ व्यवसायिक मेले का भी आयोजन किया जाएगा