यहां स्कूल में पढ़ रहे थे बच्चे तभी स्कूल में पहुंच गई जंगल की आग, बच्चों और शिक्षकों में मची अफरा-तफरी

यहां स्कूल में पढ़ रहे थे बच्चे तभी स्कूल में पहुंच गई जंगल की आग, बच्चों और शिक्षकों में मची अफरा-तफरी

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रिपोटर -ब्यूरो रिपोट

स्थान -अल्मोड़ा

अभी फायर सीजन शुरू नहीं हुआ है लेकिन पहाड़ के जंगलों में आग लगने की खबरें सामने आने लगी हैं। ऐसी ही एक खबर अल्मोड़ा से सामने आ रही है। जहां जंगल की आग स्कूल तक पहुंच गई। जिससे स्कूल में पढ़ रहे बच्चों और शिक्षकों में अफरा-तफरी मच गई। छात्र और शिक्षकों ने आग बुझाने की कोशिश की लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली। जिसके बाद सूचना मिलने पर पहुंचे दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।जंगल की आग पहुंची स्कूल तकफायर सीजन शुरू भी नहीं हुआ है लेकिन जंगल में आग लगने के मामले सामने आने लगे हैं। अल्मोड़ा के धारानौला में बीते दिन आग लग गई। ये आग इतनी भयंकर थी कि ये एक प्राथमिक स्कूल तक पहुंच गई। जब आग स्कूल परिसर में फैली तो स्कूल में बच्चे पढ़ रहे थे।

आग लगने से स्कूल में पढ़ रहे बच्चों और शिक्षकों में मची अफरा-तफरीआग लगने से स्कूल में पढ़ रहे बच्चों और शिक्षकों में अफरा-तफरी मच गई। छात्र और शिक्षक सभी आग बुझाने में जुटे रहे लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली। जिसके बाद दमकल विभाग को इसकी सूचना दी गई। सूचना पर पहुंचे दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।समय से आग पर काबू पा लेने से स्कूल को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।आग से वन संपदा को नुकसान अब तक 120 हेक्टेयर से अधिक जंगल जले फायर सीजन शुरू होने से पहले ही पहाड़ के जंगल धधक रहे हैं। अल्मोड़ा जिले में सर्दी के मौसम में अब तक जंगलों में आग की सबसे अधिक घटनाएं सामने आई हैं। अब तक जिले में 120 हेक्टेयर से भी ज्यादा जंगल आग में जल चुके हैं। बुधवार से फायर सीजन भी शुरू हो गया है और इस सीजन की पहली घटना भी सामने आ चुकी है।वन विभाग के लिए जंगलों को आग से सुरक्षित बचाना बड़ी चुनौतीसर्दियों में ही आग की घटनाओं के सामने आने से वन विभाग के लिए इस फायर सीजन में बड़ी चुनौती है। कि कैसे वन विभाग जंगलों को आग से सुरक्षित बचाएगा। वन विभाग के लिए वन संपदा और वन्य जीवों को बचाना भी कड़ी चुनौती होगी।

क्योंकि इस बार सर्दियों में बारिश और बर्फबारी भी कम हुई है। जिसके बाद वैज्ञानिकों ने इस बार भयंकर गर्मी की चेतावनी जारी कर दी है। जिसका असर अभी से दिखने लगा है। फरवरी के महीने में ही मैदानी इलाकों के साथ ही पर्वतीय इलाकों में भी पारा बढ़ने लगा है