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स्थान – हल्द्वानी

रिपोर्टर – पंकज सक्सेना

उत्तराखंड वन अनुसंधान केन्द्र द्वारा विश्व जैव विविधता दिवस के अवसर पर संरक्षित प्रजातियां हेतु अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2021-22 जारी की है| उत्तराखंड राज्य में बायो डायवर्सिटी रिसर्च के 06 केन्द्र हैं| हल्द्वानी, नैनीताल ,रानीखेत ,पिथौरागढ़, गोपेश्वर और देहरादून हैं|साल 2021- 22 में इन केन्द्रों में एक्स- सीटू व इन-सीटू संरक्षण उपायों के माध्यम से 1943 प्रजातियों को संरक्षित किया गया है |जबकि पिछले साल यह संरक्षित प्रजातियों की कुल संख्या 1576 थी| यह हम सभी लोगों के लिए चिंता का विषय है, की साल दर साल कई औषधीय गुणों और स्थानिय प्रजातियां विलुप्त होती चली जा रही है| इस वर्ष उत्तराखंड वन अनुसंधान संस्थान ने स्थानीय पौधों की प्रजातियों को संरक्षण करना था| स्थानीय प्रजातियां ऐसी प्रजातियां होती हैं, जो केवल विशेष भौगोलिक क्षेत्र में पाई जाती हैं| और दुनिया में किसी अन्य क्षेत्र में यह प्रजातियां नहीं पाई जाती हैं |ऐसे में अगर यह प्रजातियां वासस्थल से विलुप्त हो जाती हैं, तो इनका अस्तित्व हमेशा के लिए नष्ट हो जाता है| रिसर्च एवं अनुसंधान संस्थान के डीएफओ कुंदन कुमार ने बताया की जैविक दवाब जलवायु परिवर्तन और साथ ही जनसंख्या में हो रही लगातार वृद्धि के कारण इन प्रजातियों पर संकट बना हुआ है।


इस मौक़े पर वन अनुसंधान संस्थान केंद्र हल्द्वानी में आज 02 किताबों का भी विमोचन किया गया। इस दौरान उत्तराखंड जैव विविधता के जड़ी बूटियों सहित 104 प्रतीकों को संरक्षित रखने का प्रयास किया गया है| इस मौके पर महिला महाविद्यालय हल्द्वानी की छात्राओं ने जैव विविधता पर पेंटिंग प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया, साथ साथ में वन क्षेत्राधिकारी हल्द्वानी मदन सिंह बिष्ट और वानस्पतिक विज्ञान में शोध करने वाली छात्राएं भी मौजूद रही।


