तमंचे की नोक पर फैसले, लचर पुलिस व्यवस्था

तमंचे की नोक पर फैसले, लचर पुलिस व्यवस्था

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रिपोर्टर :- अज़हर मलिक

स्थान:- काशीपुर

जनपद उधम सिंह नगर फिर एक बार गोलियों की.गड़गड़ाहट.से गूंजने लगा है जा फिर से बंदूकों की नोक पर फैसले लूट डकैती मर्डर जैसे अपराधिक घटनाएं होने लगी हैं, जहां आम जनमानस को छोड़ो कानून के रक्षक ही सुरक्षित दिखाई नहीं दे रहे हैं, उनके साथ भी बदमाश लूट मारपीट जैसी अपराधिक घटनाओं को देने से चूक नहीं रहे| बदमाशों के हौसले पस्त करने की बात तो कर रही है लेकिन धरातल पर इसका कोई भी असर दिखाई नहीं दे रहा |

देवनगरी उत्तराखंड का जनपद उधम सिंह नगर वैसे तो संवेदनशील जिलों में माना जाता है, क्योंकि उत्तर प्रदेश के चार ऐसे जिलों की सीमाओं से उधम सिंह नगर मिला हुआ है| जो जिले कुख्यात बदमाशों के गढ़ माने जाते थे| जनपद उधम सिंह नगर में भी कुछ कुख्यात बदमाशों ने अपना आतंक फैला रखा था लेकिन शासन, प्रशासन की सूझबूझ से उनको क्या बदमाशों का एनकाउंटर हो गया या फिर आपसी रंजिश में मर्डर, जिसके बाद उधम सिंह नगर में कुछ गिने-चुने अपराधिक घटनाएं तो हुई है| लेकिन जिस तरीके से फिर एक बार अपराधिक घटनाओं का ग्राफ तेजी से उधम सिंह नगर में बढ़ता जा रहा है|

उससे उधम सिंह नगर के लोग अब दहशत में जीने के लिए मजबूर हो चुके हैं, क्योंकि उधम सिंह नगर में इन दिनों सरेआम फायरिंग लूट डकैती जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं हालांकि जनपद के पुलिस मुखिया अपराधिक गतिविधियों में सम्मिलित लोगों को जेल भेज कर अपनी पीठ थपथपाते हुए दिखाई दे रहे हैं लेकिन अपराधिक घटनाओं पर रोक लगाने के लिए पुलिस के मुखिया द्वारा कोई भी ठोस रणनीति तैयार होती हुई दिखाई नहीं दे रही| बदमाशों की दहशत से एक बार फिर जिला दहल उठा, जनता डर और खौफ के साए में जीने को मजबूर है|

पुलिस भले ही अपराधिक घटनाओं में शामिल लोगों को लगातार जेल भेज रही हो| लेकिन जिले की पुलिस के लिए अपराधिक घटनाएं रोकना मानो लोहे के चने चबाना जैसा हो गया है| अगर समय रहते पुलिस के आला अधिकारियों ने जनपद उधम सिंह नगर की ओर ध्यान नहीं दिया तो वह दिन दूर नहीं कि जनपद उधम सिंह नगर एक बार फिर जंगल राज के नाम से जाना जाएगा|