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रिपोर्टर- राहुल दुमका

स्थान- लाल कुआं

उत्तराखंड में भी जैविक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार के द्वारा जैविक कृषि अधिनियम लागू किया गया है| वर्तमान में जैविक कृषि का क्षेत्रफल बढ़कर 2.31 हेक्टेयर हो गया है| जो कुल कृषि क्षेत्रफल का 36% है| बताते चलें कि राज्य गठन के समय कृषि के आधीन 7.70 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल था| जो घटकर 6.48 लाख हेक्टेयर हो गया है| इसको देखते हुए सरकार किसानों को जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है| प्रदेश भर में ऑर्गेनिक कलस्टर के माध्यम परंपरागत फसल के साथ फल व सब्जियों का जैविक तरीके से उत्पादन किया जा रहा है| जिससे कि किसानों को उत्पात का ज्यादा लाभ मिल सके| परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत सरकार के द्वारा प्रदेश में 3900 जैविक खेती कलेक्टर का काम किया जा रहा है|


जिसमें कृषि विभाग की ओर से 2555, उद्यान विभाग 1341 सगंध पौधा केंद्र 45, रेशम विभाग के माध्यम से 59 क्लस्टर बनाए जा रहे हैं| एक कलेक्टर के तहत 20 हेक्टेयर क्षेत्र और 50 किसानों के समूह को शामिल किया जा रहा है| जैविक खेती कर रहे अनिल पांडे के अनुसार वह कई वर्षों से जैविक खेती करते आ रहे हैं| उन्होंने जैविक खेती के लिए प्रशिक्षण केंद्र भी खोला है| जिसके माध्यम से उन्होंने लाल कुआं तथा आसपास के क्षेत्र में कई किसानों को जैविक खेती के विषय में बताया है| उन्हें करके दिखाया है| जैविक खेती से किसानों को बहुत अधिक फायदा मिलता है| वही दूसरे किसान का कहना था की जैविक खेती से एक तो खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ती है| जो किसान को महंगा भी नहीं पड़ता और इसमें कोई रसायन भी नहीं होते हैं| जिससे खेती को और खेत को नुकसान बिल्कुल भी नहीं होता|


