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ब्यूरो रिपोर्ट

स्थान- उत्तराखंड

विधानसभा चुनाव 2022 में चार राज्यों में भाजपा की सरकार तय मानी जा रही है. इन जीत में खासतौर पर उत्तर प्रदेश जीत अहम है, जहां 35 सालों बाद कोई पार्टी सत्ता में वापसी कर रही है. वहीं, उत्तराखंड में भी इतिहास बन गया है क्योंकि अपने गठन के बाद से ही यहां की परंपरा रही थी कि उत्तराखंड में कोई भी सरकार रीपीट नहीं होती. लेकिन, यह मिथक भी टूट गया है और उत्तराखंड में भाजपा की जीत हो गई है.राजनीति के जानकार बताते हैं कि कोरोना के कहर से परेशान जनता नाराज था और सरकार बदलने के मूड में भी थी, लेकिन लोगों ने प्रदेश नेतृत्व पुष्कर सिंह धामी या अन्य किसी को न देखकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देखा और भाजपा को जीत के आसमान पर पहुंचा दिया. मोदी मैजिक के चलने की बात इसलिए भी साबित होती है कि खटीमा से चुनाव लड़ रहे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 6000 से अधिक वोटों से चुनाव हार गए.

राजनीति के जानकारों का मानना है कि भाजपा ने 2019 के आम चुनाव में बंपर जीत हासिल की थी, लेकिन अगले ही साल कोरोना ने दस्तक दी और विपक्ष की ओर से देश में महंगाई और बेरोजगारी को भी बड़ा मुद्दा बनाया गया. विपक्षी नेताओं और कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना था कि मोदी मैजिक कमजोर हो रहा है, लेकिन नतीजों ने ऐसे तमाम दावों को गलत साबित कर दिया है.उत्तराखंड में तीन मुख्यमंत्री बनाए जाने की भी चर्चा की जा रही थी, लेकिन ये सभी मुद्दे नहीं चल पाए और 2000 में उत्तराखंड के गठन के बाद यह पहला मौका है, जब किसी पार्टी को लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल हुई है. इसके अलावा उत्तराखंड में मुख्यमंत्रियों का बदलना भी भाजपा के उतना खिलाफ नहीं गया, जितना माना जा रहा था. इस बड़ी जीत के पीछे मोदी मैजिक को भी माना जा रहा है. मोदी ने अपनी नैनीताल, टिहरी, अल्मोड़ा और गढ़वाल की चार वर्चुअल रैलियों और देहरादून व हल्द्वानी की दो फिजिकल रैलियों के जरिये चुनावी फिजा ही बदल दी और ब्रांड मोदी कितना मजबूत है यह फिर साबित कर दिया.



