उत्तराखंड के इस रहस्यमयी मंदिर के बारे में सुनकर रह जायेंगे आप दंग, जानिए क्या है खास

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रिपोर्टर- पंकज सक्सेना

स्थान- उत्तराखंड

भारत एक ऐसा देश है, जहाँ लाखों मंदिर हैं और इन्हीं लाखों मंदिरों में से कई ऐसे मंदिर भी हैं जिनका रहस्य किसी को नहीं पता | कई मंदिरों का रहस्य तो वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए हैं | आज हम आपको ऐसे ही एक रहस्यमयी मंदिर के बारे में बताने जा रहें हैं, जहाँ कलयुग के समाप्त होने का राज छुपा हुआ है | भारत देश का छोटा सा राज्य उत्तराखंड, जिसे सभी देवभूमि उत्तराखंड कहकर भी पुकारते हैं | ऐसा इसलिए क्योंकि माना जाता है कि उत्तराखंड में साक्षात देवों का वास है | लेकिन क्या आप उत्तराखंड के इस रहस्यमयी मंदिर के बारे में जानते हैं ? अगर नहीं, तो चलिए आज हम बताते हैं आपको उत्तराखंड के इस मंदिर के बारे में विस्तार से |

 उत्तराखंड राज्य का पिथौरागढ़ जिला जिसे उत्तराखंड का छोटा स्विट्ज़रलैंड भी कहते हैं | इस ज़िले में स्थित है पाताल भुवनेश्वर गुफा मंदिर | यह मंदिर सुन्दरता और रहस्यों का बेजोड़ मेल है | माना जाता है कि इस मंदिर को  33 करोड़ देवी-देवताओं ने अपना निवास बना रखा है | इसकी खोज सर्वप्रथम रजा ऋतुपूर्ण ने की थी | लेकिन कलयुग में सर्वप्रथम जगत गुरु शंकराचार्य ने इस मंदिर को दुनिया से अवगत कराया था | इस गुफा का जिक्र हिंदू धर्म के स्कन्द पुराण में भी मिलता है | इस मंदिर को लेकर एक और कथा प्रचलित है कि जब भगवान शिव ने क्रोध में आकर गणेश जी का सर धड से अलग कर दिया था और जब उन्होंने गणेश जी को नया मस्तक लगाया तो जो धड से अलग हुआ मस्तक था वह भगवान शिव ने इसी मंदिर में आकर स्थापित किया |  लेकिन माना जाता है कि  इसी गुफा के गर्भ में पूरी दुनिया के खत्म होने का रहस्य छिपा हुआ  है | समुद्र तल से इस गुफा की गहराई 90 फीट है | यहाँ जाने के लिए बेहद पतले और संकीर्ण रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है |

 इस मंदिर में प्रवेश करने पर आपको चट्टानों पर हस्तशिल्प से बनी हुई कई मूर्तियाँ देखने को मिलेंगी, जिनमे से एक नाग अधिशेष की भी है | कहते हैं कि नाग अधिशेष ने ही पूरी दुनिया का भार उठा रखा है | एक और कथा के अनुसार कहते हैं कि द्वापर युग में पांडवों ने यहाँ भगवान शिव के साथ चौपाड़ भी खेला था | अब कौन सी कथा कितनी सच है, यह कहना कठिन है | लेकिन सभी के लिए यह मंदिर हमेशा से ही आस्था का केंद्र रहा है | हर साल सैलानी इस मंदिर के दर्शन और इसकी खूबसूरती को देखने के लिए बड़ी संख्या में यहाँ आते हैं |पुराणों के अनुसार इस मंदिर में चार द्वार हैं | रणद्वार,  पापद्वार, धर्मद्वार और मोक्षद्वार | कहते हैं कि जब भगवान राम ने त्रेता युग में  रावण का वध किया था तब पापद्वार का द्वार बंद हुआ था |  वहीं द्वापर युग में कुरुक्षेत्र के युद्ध के बाद रणद्वार भी बंद कर दिया गया था | मान्यता है कि कलयुग के समाप्त होने का संबध भी बचे हुए दो द्वारों के साथ है |