स्थान : हरिद्वार
ब्यूरो रिपोर्ट


उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। कांग्रेस लगातार आरोप लगा रही है कि SIR प्रक्रिया की आड़ में स्थानीय और पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है।


इसी क्रम में रानीपुर विधानसभा क्षेत्र में SIR के दौरान 56 मतदाताओं के नामों पर आपत्ति दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले को लेकर कांग्रेस ने प्रशासन के समक्ष गंभीर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।


कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी और रिटर्निंग ऑफिसर से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों के सामने 56 मतदाताओं के नामों पर दर्ज आपत्तियों को लेकर अपनी चिंता जताई और मामले की जांच कराने की मांग की।


कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि कुछ लोगों द्वारा फॉर्म-7 का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका कहना है कि फॉर्म-7 के माध्यम से पात्र मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

कांग्रेस ने प्रशासन से मांग की कि जिन 56 मतदाताओं के नामों पर आपत्ति दर्ज की गई है, उनके मामलों की व्यक्तिगत स्तर पर जांच की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि बिना उचित सत्यापन के किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से न हटाया जाए।


प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी और रिटर्निंग ऑफिसर से कहा कि SIR प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित की जानी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप होनी चाहिए और किसी भी स्तर पर राजनीतिक या अन्य दबाव की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।



कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं तो इसकी भी जांच होनी चाहिए। साथ ही आपत्ति दर्ज कराने वाले लोगों की भूमिका और उनके द्वारा दिए गए दस्तावेजों का सत्यापन किए जाने की मांग की गई।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने मामले में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना निर्वाचन प्रशासन की जिम्मेदारी है और किसी भी वैध मतदाता को अपने मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

फिलहाल रानीपुर विधानसभा क्षेत्र में 56 मतदाताओं के नामों पर दर्ज आपत्तियों का मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा में है। अब देखना होगा कि प्रशासन की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और SIR प्रक्रिया के तहत इन मतदाताओं के नामों को लेकर आगे क्या कार्रवाई की जाती है।

