किच्छा की मतदाता सूची में 8 हजार से अधिक कथित दोहरे नामों का दावा, जांच की मांग

किच्छा की मतदाता सूची में 8 हजार से अधिक कथित दोहरे नामों का दावा, जांच की मांग

स्थान : किच्छा
ब्यूरो रिपोर्ट

किच्छा विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में उत्तर प्रदेश के बरेली, पीलीभीत और रामपुर जिलों से जुड़े 8,000 से अधिक कथित दोहरे मतदाताओं के नाम दर्ज होने का मामला सामने आया है। भाजपा किच्छा विधानसभा क्षेत्र के बीएलए-1 राजेश तिवारी ने निर्वाचन आयोग के समक्ष आपत्तियां दर्ज कराते हुए संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

पत्रकारों से बातचीत में राजेश तिवारी ने बताया कि विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न बूथों पर बीएलए-2 की ओर से की गई समीक्षा के दौरान कथित तौर पर ऐसे नाम सामने आए, जो उत्तर प्रदेश की संबंधित मतदाता सूचियों के साथ-साथ किच्छा विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में भी दर्ज बताए गए हैं।

राजेश तिवारी ने दावा किया कि समीक्षा और दस्तावेजों के मिलान के दौरान ऐसे 8,000 से अधिक कथित दोहरे नामों का विवरण तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इन नामों की जांच आवश्यक है, ताकि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने बताया कि कथित दोहरे मतदाताओं से संबंधित जानकारी में मतदाता का नाम, पिता या पति का नाम, विधानसभा क्षेत्र, बूथ संख्या, क्रमांक, आयु और ईपीआईसी नंबर समेत अन्य विवरण शामिल किए गए हैं।

राजेश तिवारी के अनुसार, संबंधित दस्तावेज और आपत्तियां निर्वाचन अधिकारियों को उपलब्ध करा दी गई हैं। उन्होंने निर्वाचन आयोग से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जांच में दोहरी प्रविष्टियां सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

वहीं, इस मामले में उपजिलाधिकारी किच्छा गौरव पांडे ने बताया कि किच्छा विधानसभा क्षेत्र में करीब 10 हजार से अधिक आपत्तियां दर्ज हुई हैं। उन्होंने कहा कि सभी आपत्तियों की निष्पक्ष तरीके से जांच की जाएगी।

प्रशासन के अनुसार, मतदाता सूची से संबंधित प्राप्त आपत्तियों की जांच निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाएगी। दस्तावेजों और संबंधित रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन नामों में वास्तव में दोहरी प्रविष्टि है।

मामले के सामने आने के बाद किच्छा विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की नजर प्रशासन की जांच और सत्यापन प्रक्रिया पर है, जिसके बाद कथित दोहरे मतदाताओं को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।