हल्द्वानी में ‘शुद्धिकरण’ को लेकर नवीन दुम्का का कांग्रेस पर हमला

हल्द्वानी में ‘शुद्धिकरण’ को लेकर नवीन दुम्का का कांग्रेस पर हमला

स्थान : लालकुआँ (हल्द्वानी)
ब्यूरो रिपोर्ट

लालकुआँ के पूर्व विधायक नवीन चंद्र दुम्का ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हालिया हल्द्वानी जनसभा के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को राष्ट्रीय राजनीति से जोड़ते हुए राजनीतिक दलों के तौर-तरीकों पर सवाल उठाए।

नवीन दुम्का ने कहा कि हल्द्वानी में जनसभा के बाद जिस तरह ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम आयोजित किया गया, उसका मुद्दा राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में नेता सदन और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का संदर्भ लेते हुए भी इस विषय पर चर्चा सामने आई थी।

पूर्व विधायक ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से उनका मानना है कि वर्तमान सामाजिक परिवेश में इस तरह के शुद्धिकरण कार्यक्रमों का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से कई बार अनावश्यक विवाद पैदा होते हैं और इसके राजनीतिक एवं सामाजिक दुष्परिणाम भी सामने आ सकते हैं।

उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे और जेपी नड्डा के बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि जब खड़गे ने इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाकर राजनीतिक रूप से अपनी बात रखी, तो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी सदन में अपनी और पार्टी की भावना स्पष्ट रूप से सामने रखी।

नवीन दुम्का ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस एक राजनीतिक दल है और उसे हर राजनीतिक मुद्दे पर अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि पूर्व में मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से नमाज के दौरान सांप से संबंधित उदाहरण दिए जाने को लेकर भाजपा ने भी इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया था।

उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस को इस पूरे प्रकरण में राजनीतिक अवसर नजर आ रहा है और वह इसे अपने तरीके से उठा रही है। उनके मुताबिक, राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहता है, लेकिन ऐसे मामलों को सामाजिक स्तर पर विवाद का कारण नहीं बनना चाहिए।

पूर्व विधायक ने स्पष्ट किया कि हल्द्वानी में हुए कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम से भाजपा कार्यकर्ताओं का कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण को भाजपा कार्यकर्ताओं से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।

नवीन दुम्का ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन समाज में आपसी सौहार्द और भाईचारा बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है। उन्होंने ऐसे मामलों में संयम बरतने की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि हल्द्वानी की घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी आगे भी जारी रह सकती है, लेकिन इसे सामाजिक तनाव का कारण नहीं बनने देना चाहिए। उनके बयान के बाद इस मुद्दे पर स्थानीय राजनीति में एक बार फिर सियासी बहस तेज होने के आसार हैं।