कंडोलिया महोत्सव की रंगत में सराबोर हुई संस्कृति नगरी पौड़ी

कंडोलिया महोत्सव की रंगत में सराबोर हुई संस्कृति नगरी पौड़ी

स्थान : पौड़ी
ब्यूरो रिपोर्ट

संस्कृति नगरी पौड़ी इन दिनों कंडोलिया महोत्सव की रंगत में पूरी तरह सराबोर है। मंडल मुख्यालय में आयोजित इस भव्य महोत्सव में खेल, संस्कृति और धार्मिक आस्था का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। महोत्सव में भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रवासी भी पौड़ी पहुंच रहे हैं, जिससे पूरे नगर में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है।

कंडोलिया मैदान में दिनभर विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। इनमें आयोजित फुटबॉल प्रतियोगिता लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। मैदान में खिलाड़ियों के जोश और दर्शकों के उत्साह ने आयोजन को और भी जीवंत बना दिया है।

बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों सहित हर आयु वर्ग के लोगों में महोत्सव को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है। लोग पूरे परिवार के साथ कार्यक्रमों में भाग लेकर आयोजन का आनंद उठा रहे हैं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ाव महसूस कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री द्वारा कंडोलिया महोत्सव को राजकीय महोत्सव घोषित किए जाने के बाद नगर वासियों में खुशी की लहर है। लोगों का मानना है कि राजकीय संरक्षण मिलने से महोत्सव की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी तथा भविष्य में इसका स्वरूप और अधिक भव्य बनेगा।

महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ रस्साकस्सी, हेयर स्टाइल प्रतियोगिता, स्टारगेजिंग, शास्त्रीय संगीत, मेहंदी, बेबी शो, चित्रकला, सामान्य ज्ञान, कवि सम्मेलन, म्यूजिकल चेयर और रंगोली जैसी अनेक प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। इन आयोजनों में प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है।

इसके अलावा वॉलीबॉल, फैंसी ड्रेस, अल्पना, स्नूकर, शतरंज, कैरम, फोटोग्राफी प्रदर्शनी, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, साइकिलिंग और मैराथन जैसी प्रतियोगिताएं भी महोत्सव की शोभा बढ़ा रही हैं। विभिन्न आयु वर्ग के प्रतिभागी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।

पालिका अध्यक्ष हिमानी नेगी ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राजकीय दर्जा मिलने से कंडोलिया महोत्सव की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी नगरवासियों का भी धन्यवाद किया।

स्थानीय लोगों के अनुसार कंडोलिया महोत्सव केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि केदारखंड और मानसखंड को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक एवं धार्मिक सेतु है। मान्यता है कि कंडोलिया देवता गोल्ज्यू महाराज का स्वरूप हैं, जिन्हें कुमाऊं के चंपावत से लाकर पौड़ी में स्थापित किया गया था। यही कारण है कि यह महोत्सव आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है।