

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट


उत्तराखंड वक्फ बोर्ड में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पद को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद और हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब सरकार ने संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी की स्थायी नियुक्ति कर दी है। इससे पहले अपर सचिव स्तर की नियुक्ति को लेकर मामला न्यायालय में चुनौती दिया गया था।


जानकारी के अनुसार, स्थायी सीईओ की नियुक्ति न होने की स्थिति में अब तक निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को अस्थायी रूप से चार्ज दिया गया था। लेकिन नए निदेशक की तैनाती के बाद यह जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी गई है, जिसे प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है।



उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष Shadab Shams ने कहा कि स्थायी सीईओ की अनुपस्थिति के कारण नोटिस जारी करने और प्रशासनिक कार्यों में देरी हो रही थी। अब नए सीईओ की नियुक्ति के बाद सभी कामकाज व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ेंगे।


उन्होंने बताया कि नए अधिकारी के आने से वक्फ संपत्तियों से जुड़े मामलों की निगरानी और कार्रवाई में तेजी आएगी। साथ ही अवैध कब्जों को हटाने और लंबित मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया भी तेज की जाएगी।
शम्स ने यह भी कहा कि राज्य सरकार अवैध कब्जेदारों के खिलाफ सख्त रुख अपना रही है, जिसके चलते कई मामले ट्रिब्यूनल तक पहुंच रहे हैं। संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जा करने वालों और वक्फ माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई देखने को मिलेगी। साथ ही ‘उम्मीद पोर्टल’ पर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को भी तेजी से पूरा किया जाएगा।


उन्होंने दावा किया कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी होगी, जिससे लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण संभव हो सकेगा।

