

स्थान : पौड़ी
ब्यूरो रिपोर्ट


पौड़ी गढ़वाल और यमकेश्वर क्षेत्र को जोड़ने वाले बहुप्रतीक्षित सिंग्टाली पुल के शिलान्यास कार्यक्रम के बाद एक नया विवाद सामने आ गया है। शिलान्यास स्थल पर लगाए गए शिलापट में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और क्षेत्रीय विधायक रेणु बिष्ट का नाम अंकित है, लेकिन गढ़वाल लोकसभा सांसद अनिल बलूनी का नाम शामिल नहीं किए जाने को लेकर चर्चा तेज हो गई है।


शिलापट में सांसद का नाम न होने के बाद क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। स्थानीय लोगों और राजनीतिक हलकों में इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।



इस मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विकास कार्यों से जुड़े शिलान्यास और लोकार्पण पट्टों पर संबंधित सभी जनप्रतिनिधियों के नाम का उल्लेख होना चाहिए। उन्होंने माना कि इस प्रकार के शिलापट्ट में गढ़वाल सांसद का नाम शामिल किया जाना उचित होता।


गौरतलब है कि सांसद अनिल बलूनी सिंग्टाली पुल परियोजना को लेकर लगातार सक्रिय रहे हैं और इस मुद्दे पर उन्होंने पूर्व में मुख्य सचिव से भी मुलाकात की थी। वे इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत रहे हैं।
ऐसे में शिलापट्ट पर उनका नाम शामिल न होना राजनीतिक हलकों में सवाल खड़े कर रहा है। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या यह केवल प्रशासनिक चूक है या इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश भी छिपा है।


राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के विवाद अक्सर विकास कार्यों से जुड़े कार्यक्रमों में सामने आते रहते हैं, लेकिन समय के साथ इनका प्रभाव स्थानीय राजनीति पर भी दिखाई देता है।


फिलहाल इस मामले पर आधिकारिक स्तर से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, लेकिन क्षेत्र में यह मुद्दा लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।

