

स्थान : मसूरी
ब्यूरो रिपोर्ट


झड़ीपानी क्षेत्र में भूमिधरों और उत्तर रेलवे के बीच भूमि विवाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद उत्तर रेलवे द्वारा स्थानीय लोगों को लगातार नोटिस जारी किए जाने और कार्रवाई किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इससे क्षेत्र के लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।


बताया गया कि बुधवार को रेलवे पुलिस और ओक ग्रोव स्कूल प्रशासन की एक संयुक्त टीम जेसीबी मशीन के साथ मौके पर पहुंची। टीम ने स्कूल गेट के समीप स्थित एक दुकान को हटाने की कार्रवाई शुरू करने का प्रयास किया, लेकिन स्थानीय लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया। विरोध बढ़ने पर रेलवे प्रशासन को अपनी कार्रवाई बीच में ही रोकनी पड़ी।



स्थानीय निवासियों का कहना है कि उत्तर रेलवे और भूमिधरों के बीच भूमि सीमांकन को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। कई बार सीमांकन की प्रक्रिया भी पूरी की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद रेलवे प्रशासन सीमांकन रिपोर्ट को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है और लगातार लोगों को नोटिस भेज रहा है।


लोगों का आरोप है कि यह मामला पहले से ही उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद रेलवे प्रशासन बिना किसी पूर्व सूचना के मौके पर पहुंचकर कार्रवाई का प्रयास करता है, जिससे स्थानीय निवासियों को मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय निवासी शुभम गुप्ता ने बताया कि संबंधित भूमि और भवन करीब 40 वर्षों से उनके परिवार के नाम दर्ज हैं। उनके अनुसार न्यायालय द्वारा भी स्पष्ट किया जा चुका है कि ऊपरी भूमि पर रेलवे का कोई अधिकार नहीं है, लेकिन इसके बावजूद रेलवे अधिकारी समय-समय पर नोटिस जारी कर लोगों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक न्यायालय का अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई उचित नहीं है।

भवन स्वामी आशु गुप्ता ने बताया कि उनके पास भवन कर, रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज समेत सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं। इसके बावजूद उन्हें हर महीने नोटिस भेजे जाते हैं और कई बार जेसीबी मशीन के माध्यम से निर्माण तोड़ने का प्रयास भी किया जा चुका है। हालांकि स्थानीय लोगों के विरोध के चलते हर बार कार्रवाई रोकनी पड़ी है।


स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि उत्तर रेलवे के पास अपने दावों को साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज नहीं हैं, फिर भी क्षेत्रवासियों का उत्पीड़न किया जा रहा है। वहीं रेलवे प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। क्षेत्र के लोग अब न्यायालय के अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं और प्रशासन से निष्पक्ष समाधान की मांग कर रहे हैं।

