

स्थान : चमोली
ब्यूरो रिपोर्ट


उत्तराखंड में जहां एक ओर चारधाम यात्रा और पंच केदार क्षेत्र में तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ उमड़ रही है, वहीं दूसरी ओर चमोली जिले के उच्च हिमालयी ट्रैकिंग रूट भी इन दिनों साहसिक पर्यटन प्रेमियों से गुलजार नजर आ रहे हैं। देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में ट्रैकर्स और पर्वतारोही इन दुर्गम ट्रेकिंग मार्गों का रुख कर रहे हैं।


जनपद के ऐतिहासिक लॉर्ड कर्जन ट्रैक, द्रोणागिरी-बागनी ट्रैक, गमशाली-गुप्तखाल हिडन पास ट्रैक, आध्यात्मिक महत्व वाले सतोपंथ सरोवर ट्रैक और चुनौतीपूर्ण पनपतिया कॉल ट्रैक पर इन दिनों ट्रैकिंग गतिविधियां चरम पर हैं। विशेष रूप से बंगाल और महाराष्ट्र के ट्रैकिंग दल इन उच्च हिमालयी मार्गों को लेकर काफी उत्साहित दिखाई दे रहे हैं।



सबसे कठिन और जोखिमपूर्ण माने जाने वाले पनपतिया कॉल ट्रैक को पूरा कर जोशीमठ लौटे स्नो लाइन ट्रेकर्स के प्रभारी सोहन सिंह ने बताया कि उनके दल ने इस सीजन का पहला सफल पनपतिया कॉल अभियान पूरा किया है। उन्होंने कहा कि खराब मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह ट्रैक पहले कई हादसों का भी गवाह रहा है, लेकिन इसके बावजूद इसका रोमांच ट्रैकर्स को लगातार आकर्षित करता है।


वहीं वर्ष 1933 में ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रैंक स्मिथ द्वारा पहली बार पार किए गए गुप्तखाल हिडन पास ट्रैक की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ रही है। इस साहसिक ट्रैक को एक्सप्लोर करने के लिए देशभर से ट्रैकिंग दल पहुंच रहे हैं और स्थानीय टूर ऑपरेटरों को लगातार बुकिंग मिल रही है।

गुप्तखाल-बद्रीनाथ ट्रैक को पूरा कर लौटे स्थानीय ट्रैकर कपिल नेगी ने बताया कि इस ट्रैक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें एक साथ दो उच्च हिमालयी दर्रों का अनुभव प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि रोमांच, प्राकृतिक सौंदर्य और चुनौतीपूर्ण मार्ग इसे ट्रैकिंग प्रेमियों के लिए बेहद खास बनाते हैं।


विशेषज्ञों के अनुसार मई-जून तथा सितंबर-अक्टूबर का समय इन हाई एल्टीट्यूड ट्रेक्स के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। मौसम अनुकूल रहने के कारण इन महीनों में बड़ी संख्या में पर्वतारोही और ट्रैकिंग दल चमोली के विभिन्न ट्रेकिंग रूटों पर पहुंचते हैं।


उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ट्रैकिंग अभियानों की बढ़ती संख्या का सीधा लाभ स्थानीय पर्यटन कारोबार को मिल रहा है। होटल, होमस्टे, गाइड, पोर्टर और टूर ऑपरेटरों की आय में वृद्धि हो रही है। चारधाम यात्रा के साथ-साथ साहसिक और आध्यात्मिक पर्यटन के बढ़ते आकर्षण ने उत्तराखंड के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय विकास के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

