

स्थान : संजय जोशी
लोकेशन -: अल्मोड़ा

अल्मोड़ा में मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना (एमपीआरवाई) के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सृजन और आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है। जिला प्रशासन की सतत मॉनिटरिंग से योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है, ताकि लोगों को अपने ही गांव में रोजगार के अवसर मिल सकें।


परियोजना निदेशक डीआरडीए के.एन. तिवारी ने बताया कि यह योजना वर्ष 2020-21 से संचालित है। इसके अंतर्गत राज्य पलायन निवारण आयोग द्वारा जनपद के 8 विकासखंडों के 78 राजस्व गांवों को चिन्हित किया गया है, जहां विशेष विकास कार्य किए जा रहे हैं।

योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराकर पलायन की प्रवृत्ति को कम करना है। इसके तहत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई आजीविका आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

इन गतिविधियों में पॉलीहाउस और मशरूम उत्पादन, बकरी और मुर्गी पालन, डेयरी विकास, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, सौर ऊर्जा, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, ईको पार्क, जैविक खेती, सब्जी क्लस्टर विकास और जड़ी-बूटी संवर्धन जैसे कार्य शामिल हैं।
इसके साथ ही शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है, जिसमें विद्यालयों में अतिरिक्त कक्ष निर्माण, पेयजल व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण और खेल मैदानों का विकास प्रमुख है।

जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के अनुसार, वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक इस योजना के लिए कुल 862 लाख रुपये की धनराशि प्राप्त हुई थी, जिसके तहत 117 कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। अब तक 727 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं और 111 कार्य पूरे हो चुके हैं।


जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने कहा कि योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाना और पलायन को रोकना है। उन्होंने अधिकारियों को सभी कार्य समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य विकास अधिकारी रामजी शरण शर्मा ने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए नई कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। इसके तहत 19 नई योजनाएं प्रस्तावित की गई हैं, जिनमें कृषि, सिंचाई, पशुपालन, जल संरक्षण और स्वरोजगार से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं।
इन प्रस्तावित योजनाओं के लिए कुल 193.28 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इन प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पलायन की समस्या में उल्लेखनीय कमी आएगी।
कुल मिलाकर, अल्मोड़ा में यह योजना ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

