देहरादून में भीषण गर्मी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, अस्पतालों में विशेष इंतजाम

देहरादून में भीषण गर्मी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, अस्पतालों में विशेष इंतजाम

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड में तापमान लगातार बढ़ने के साथ ही भीषण गर्मी ने दस्तक दे दी है। बढ़ते पारे को देखते हुए देहरादून का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने जिले के सभी सरकारी अस्पतालों को गर्मी से निपटने के लिए विशेष तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं।

राजधानी देहरादून में बढ़ती तपिश के मद्देनज़र स्वास्थ्य सेवाओं को हाई अलर्ट पर रखा गया है। CMO डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सभी अस्पतालों में मरीजों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाए।

निर्देशों के अनुसार वार्डों में कूलर और पंखों की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। विशेष रूप से लेबर रूम, बच्चों के वार्ड और बुजुर्गों के वार्ड में एयर कंडीशनिंग और पर्याप्त कूलिंग सिस्टम की व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है, ताकि मरीजों को गर्मी से राहत मिल सके।

स्वास्थ्य विभाग ने गर्मी के दौरान बढ़ने वाली जल जनित बीमारियों जैसे डायरिया, टाइफाइड और पेट दर्द को लेकर भी सतर्कता बढ़ा दी है। इसके लिए अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाइयों और आवश्यक IV फ्लूइड्स का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया गया है।

CMO डॉ. शर्मा ने बताया कि सभी अस्पतालों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। डॉक्टरों और स्टाफ को भी अलर्ट मोड में रखा गया है, ताकि मरीजों को तुरंत इलाज मिल सके।

उन्होंने आम जनता से भी सावधानी बरतने की अपील की है। डॉ. शर्मा ने कहा कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच धूप सबसे अधिक तेज रहती है, ऐसे में इस समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए।

उन्होंने सलाह दी कि यदि बाहर जाना जरूरी हो तो हल्के और सूती कपड़े पहनें, सिर को ढककर रखें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। ताजे और स्वच्छ भोजन का सेवन करने की भी सलाह दी गई है।

डॉ. शर्मा ने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की तबीयत खराब होने जैसे चक्कर आना, सिरदर्द या कमजोरी महसूस होने पर तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल से संपर्क किया जाए।

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि गर्मी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए सभी स्तरों पर निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि लोगों को सुरक्षित और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।