लंढौर छावनी परिषद का नाम बदलने के प्रस्ताव पर बढ़ा विरोध

लंढौर छावनी परिषद का नाम बदलने के प्रस्ताव पर बढ़ा विरोध

स्थान : मसूरी
ब्यूरो रिपोर्ट

मसूरी के लंढौर क्षेत्र में छावनी परिषद का नाम बदलकर “रामगिर” करने के प्रस्ताव को लेकर विरोध तेज हो गया है। शहर के सामाजिक संगठनों, व्यापारियों, राजनीतिक दलों और आम जनता ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जतानी शुरू कर दी है।

आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि पर मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन सहित कई संगठनों और छावनी परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष ने इस प्रस्ताव के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराई। लोगों का कहना है कि लंढौर छावनी परिषद की अपनी एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान है, जिसे बदलना उचित नहीं होगा।

स्थानीय निवासियों का मानना है कि इस क्षेत्र में चार दुकान, लाल टिब्बा जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल और कई महत्वपूर्ण संस्थान मौजूद हैं, जो लंढौर के नाम से ही प्रसिद्ध हैं। नाम परिवर्तन से इस पहचान पर असर पड़ेगा और भ्रम की स्थिति पैदा होगी।

इसके अलावा लोगों ने यह भी चिंता जताई कि नाम बदलने की स्थिति में उन्हें अपने सभी सरकारी और निजी दस्तावेजों में बदलाव करना पड़ेगा, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ेगा। आम नागरिकों के लिए यह प्रक्रिया जटिल और खर्चीली साबित हो सकती है।

मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने कहा कि उनकी संस्था ने भी इस प्रस्ताव के खिलाफ कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में छावनी परिषद को औपचारिक रूप से विज्ञापन के माध्यम से आपत्ति भेजी गई है।

रजत अग्रवाल का कहना है कि नाम बदलने से लंढौर की ऐतिहासिक पहचान और अस्तित्व को नुकसान पहुंचेगा। यह क्षेत्र देश-विदेश के पर्यटकों के बीच अपनी अलग पहचान रखता है, जिसे बनाए रखना जरूरी है।

विरोध कर रहे लोगों ने प्रशासन से इस प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी भी निर्णय से पहले स्थानीय जनता की भावनाओं और क्षेत्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का सम्मान किया जाना चाहिए।

फिलहाल इस मुद्दे पर प्रशासन की ओर से अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है, लेकिन बढ़ते विरोध के चलते यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है।