

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट


चमोली कर्णप्रयाग में 16 जून को हुए विवाद और उसमें घायल लोगों तथा एक निहंग से जुड़े मामले में पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर पर क्रॉस FIR दर्ज कर ली है। इसके साथ ही मामले की जांच चमोली पुलिस से हटाकर हरिद्वार पुलिस को सौंप दी गई है, ताकि जांच को निष्पक्ष और प्रभावित होने से बचाया जा सके।


पुलिस प्रशासन के इस निर्णय के बाद अब यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का विषय बन गया है। जांच स्थानांतरण को लेकर विभिन्न संगठनों और नेताओं ने सवाल खड़े किए हैं।



भाकपा (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने जांच को चमोली से हरिद्वार स्थानांतरित किए जाने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि जब घटना चमोली जिले में हुई है, तो इसकी जांच हरिद्वार पुलिस को सौंपने का निर्णय समझ से परे है।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए स्थानांतरण किया गया है, तो फिर चमोली और हरिद्वार के बीच स्थित पौड़ी, रुद्रप्रयाग या अन्य जिलों को जांच क्यों नहीं दी गई।

इंद्रेश मैखुरी ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस तरह के फैसलों से यह प्रतीत होता है कि पुलिस व्यवस्था को क्षेत्रवाद के आधार पर बांटा जा रहा है, जो कि गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि आखिर किस आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि चमोली पुलिस इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती। उन्होंने इस निर्णय को पारदर्शिता के खिलाफ बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की।


भाकपा (माले) नेता ने कहा कि इस तरह मुकदमों को एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरित करना एक गलत परंपरा को जन्म दे सकता है, जो भविष्य में पुलिस व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करेगा।
फिलहाल पुलिस प्रशासन का कहना है कि जांच को निष्पक्ष बनाए रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।

