हल्द्वानी में पत्रकारों का SSP कार्यालय पर विरोध, फर्जी पत्रकारों और सोशल ट्रोलर्स पर सख्त कार्रवाई की मांग

हल्द्वानी में पत्रकारों का SSP कार्यालय पर विरोध, फर्जी पत्रकारों और सोशल ट्रोलर्स पर सख्त कार्रवाई की मांग

स्थान : हल्द्वानी
ब्यूरो रिपोर्ट

हल्द्वानी में मंगलवार को पत्रकार समुदाय का आक्रोश खुलकर सामने आया, जब श्रमजीवी पत्रकार यूनियन उत्तराखंड के नेतृत्व में दर्जनों पत्रकार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) नैनीताल डॉ. मंजूनाथ टीसी के कार्यालय पहुंचे। इस दौरान पत्रकारों ने फर्जी पत्रकारिता और सोशल मीडिया पर बढ़ती अराजकता के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया।

पत्रकारों ने मांग की कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, यूट्यूब चैनलों और स्वयंभू पत्रकारों द्वारा फैलाए जा रहे कथित दुष्प्रचार और अभद्रता पर सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि ऐसे तत्व पत्रकारिता की गरिमा को नुकसान पहुंचा रहे हैं और समाज में भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं।

ज्ञापन में एक मामले का उल्लेख करते हुए यूनियन पदाधिकारियों ने कमल कफलटिया नामक व्यक्ति पर एक प्रिंट मीडिया पत्रकार के साथ बुद्ध पार्क में कथित अभद्रता और हमले के आरोप लगाए। यूनियन का कहना है कि इस तरह की घटनाएं स्थानीय पत्रकारों में असुरक्षा का माहौल पैदा कर रही हैं।

इधर, पुलिस प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच का आश्वासन दिया है। पत्रकारों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ऐसे मामलों के पीछे किसी प्रकार का राजनीतिक संरक्षण हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को लेकर पत्रकारों ने कहा कि कुछ यूट्यूब और सोशल मीडिया अकाउंट्स व्यूज और लोकप्रियता के लिए पत्रकारों को निशाना बना रहे हैं और झूठी खबरें फैला रहे हैं, जिससे मीडिया की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।

यूनियन ने मांग की कि संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट्स की साइबर फॉरेंसिक जांच कराई जाए और आईटी एक्ट के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही पत्रकारों की सुरक्षा के लिए विशेष हेल्पलाइन और सुरक्षा व्यवस्था की भी मांग रखी गई।

इस दौरान SSP डॉ. मंजूनाथ टीसी ने पत्रकारों को आश्वस्त किया कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों और फर्जी खबर फैलाने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी। उन्होंने साइबर सेल को तत्काल जांच के निर्देश दिए।

पत्रकारों के इस विरोध प्रदर्शन को क्षेत्र में बढ़ते मीडिया सुरक्षा मुद्दों से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि यह मामला आगे राज्य स्तर पर भी पत्रकार सुरक्षा और सोशल मीडिया नियंत्रण को लेकर बहस को और तेज कर सकता है।