

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड के देहरादून जनपद के चकराता क्षेत्र से आस्था और परंपरा से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। जौनसार-बावर के आराध्य देव चालदा महासू महाराज 39 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद 7 मई को खत कोरू स्थित कचटा मंदिर में अपने नए प्रवास पर विराजमान होंगे।


देवता के आगमन से पहले उनके प्रतीक “डोरिया” को विधिविधान के साथ खत कोरू पहुंचा दिया गया है। इस पावन क्षण के साक्षी बनने के लिए दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु क्षेत्र में पहुंच रहे हैं, जिससे पूरा इलाका भक्तिमय माहौल में डूबा हुआ है।


श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज रहा है और धार्मिक उत्साह अपने चरम पर है। स्थानीय लोग इस आयोजन को ऐतिहासिक मान रहे हैं, क्योंकि दशकों बाद अपने आराध्य देव का आगमन हो रहा है।


7 मई को होने वाले इस विशेष आयोजन को लेकर तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए प्रशासन और स्थानीय समितियां व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटी हैं।

आयोजन के दौरान करीब 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए भोजन, पानी, सुरक्षा और यातायात सहित सभी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

देव परंपराओं और धार्मिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए पूरे आयोजन के दौरान मांस और मदिरा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, ताकि पवित्रता और अनुशासन बनाए रखा जा सके।

लंबे इंतजार के बाद अपने आराध्य देव के आगमन को लेकर श्रद्धालुओं में गहरा उत्साह और भावनात्मक जुड़ाव देखने को मिल रहा है। यह आयोजन न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


