एग्रीस्टैक योजना से किसानों को डिजिटल ताकत, उत्तराखंड में अंश निर्धारण कार्य तेज

एग्रीस्टैक योजना से किसानों को डिजिटल ताकत, उत्तराखंड में अंश निर्धारण कार्य तेज

स्थान : रामनगर
ब्यरो रिपोर्ट

किसानों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार की पहल अब जमीन पर नजर आने लगी है। एग्रीस्टैक योजना के तहत उत्तराखंड में अंश निर्धारण का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे किसानों को अपनी जमीन से जुड़ी जानकारी अब मोबाइल पर ही उपलब्ध हो सकेगी।

यह योजना भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसके तहत पूरे देश में भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण और किसानों के डाटा का एकीकरण किया जा रहा है। उत्तराखंड में भी इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है, जिससे किसानों को अपनी भूमि संबंधी जानकारी पारदर्शी और सरल तरीके से मिल सके।

अंश निर्धारण प्रक्रिया के माध्यम से अब हर किसान अपनी जमीन में हिस्सेदारी यानी “अंश” को स्पष्ट रूप से जान सकेगा। खास बात यह है कि यह जानकारी खतौनी के जरिए सीधे मोबाइल ऐप पर उपलब्ध होगी, जिससे किसानों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

योजना लागू होने के बाद फार्मर रजिस्ट्री तैयार की जाएगी, जिससे किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से मिल सकेगा। साथ ही, भूमि अभिलेखों के डिजिटल होने से विवादों में कमी आएगी और पूरी प्रक्रिया अधिक सरल व सुलभ बनेगी।

लेखपाल संघ के जिला अध्यक्ष तारा चंद्र घिल्डियाल ने बताया कि एग्रीस्टैक योजना के तहत प्रदेश की सभी तहसीलों में अंश निर्धारण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद किसान अपनी खतौनी के माध्यम से मोबाइल ऐप पर अपनी भूमि का विवरण देख सकेंगे, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ समय-समय पर आसानी से मिल सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल किसानों की सुविधा बढ़ाएगी, बल्कि उन्हें तकनीकी रूप से भी सशक्त बनाएगी, जिससे वे आधुनिक कृषि व्यवस्था से जुड़कर अपनी आय में भी वृद्धि कर सकेंगे।