
स्थान : खटीमा
रिपोर्टर : अशोक सरकार

खटीमा से बड़ी खबर सामने आई है, जहां विधायक भुवन कापड़ी ने प्रदेश सरकार की गेहूं खरीद नीति को लेकर प्रेस वार्ता कर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से रखते हुए सरकार से तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की।


विधायक कापड़ी ने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए मंडियों के बजाय गांव स्तर पर ही क्रय केंद्र स्थापित किए जाने चाहिए, ताकि छोटे और सीमांत किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी न हो। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था किसानों के लिए बेहद असुविधाजनक साबित हो रही है।


उन्होंने बताया कि 64 गांवों के बड़े क्षेत्र के लिए केवल 35 क्रय केंद्र बनाए गए हैं, जो कि “ऊंट के मुंह में जीरा” के समान हैं। कापड़ी ने मांग की कि अशोक फार्म, कुआं खेड़ा, भुडिया थारू और मझोला जैसे गांवों में पहले से संचालित क्रय केंद्रों को दोबारा शुरू किया जाए।


विधायक ने गेहूं खरीद के लक्ष्य पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जहां धान की खरीद 65 लाख कुंटल तक की गई, वहीं गेहूं का लक्ष्य मात्र 5 लाख कुंटल रखा गया है, जो किसानों के साथ अन्याय है।
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2585 प्रति कुंटल है, जबकि बाजार में गेहूं की कीमत गिरकर करीब ₹2000 प्रति कुंटल तक पहुंच गई है। इस अंतर के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कापड़ी के अनुसार, कम MSP और सीमित क्रय केंद्रों के चलते छोटे किसानों को प्रति 20 कुंटल पर लगभग ₹11,000 का सीधा नुकसान झेलना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ रहा है।

विधायक ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील का हवाला देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों के कारण गेहूं के दामों में लगातार गिरावट आ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द क्रय केंद्रों की संख्या नहीं बढ़ाई और खरीद लक्ष्य में वृद्धि नहीं की, तो सीमांत किसानों के सामने गंभीर आजीविका संकट खड़ा हो सकता है।

