

स्थान :सितारगंज
रिपोर्टर : तनवीर आंसरी


सितारगंज उपजिला चिकित्सालय में बच्चे के जन्म के बाद एक प्रसूता की मौत हो जाने से अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया।


जानकारी के अनुसार ग्राम गोठा निवासी आरती की शादी सिकंदर के साथ हुई थी। आरती गर्भवती थी और प्रसव पीड़ा होने पर परिवारजन उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। अस्पताल में महिला ने बच्चे को जन्म दिया, लेकिन प्रसव के बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी।


परिजनों का आरोप है कि महिला का समय पर सही उपचार नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि हालत गंभीर होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने उचित इलाज देने के बजाय उसे निजी अस्पताल रेफर करने की सलाह दी।


बताया जा रहा है कि शनिवार देर रात करीब दो बजे महिला की मौत हो गई। महिला की मौत की सूचना मिलते ही परिजन भड़क गए और अस्पताल में चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा शुरू कर दिया।

स्थिति बिगड़ने की सूचना पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने परिजनों और अस्पताल प्रशासन के बीच बातचीत कर माहौल शांत कराने का प्रयास किया। अस्पताल परिसर में काफी देर तक तनाव की स्थिति बनी रही।


परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में लगातार लापरवाही बरती गई और अंतिम समय में डॉक्टरों ने जिम्मेदारी से बचने के लिए महिला को रेफर कर दिया। उनका कहना था कि अगर समय रहते बेहतर इलाज मिलता तो महिला की जान बचाई जा सकती थी।


इस मामले पर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता नवतेज पाल ने भी अस्पताल प्रशासन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अस्पताल में आए दिन लापरवाही की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिसके कारण कई लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने चिकित्सा अधीक्षक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए वरिष्ठ डॉक्टरों को जिम्मेदारी देने की मांग की।
वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुलदीप यादव ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी द्वारा तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया गया है, जो तीन दिन के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

