

ब्यूरो रिपोर्ट

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्रों का आंदोलन भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन संसद का मानसून सत्र अब भी हंगामेदार रहने के संकेत दे रहा है। विपक्ष ने साफ कर दिया है कि छात्रों के आंदोलन की समाप्ति के बाद भी पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था, छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई और अन्य जनहित के मुद्दों को सदन में मजबूती से उठाया जाएगा। कांग्रेस के एक पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छात्रों का जंतर-मंतर आंदोलन खत्म हुआ है, लेकिन देशहित से जुड़े कई अहम मुद्दों पर जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाते हुए सरकार से जवाब मांगा जाएगा।


मानसून सत्र का पहला सप्ताह नीट पेपर लीक और छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर भारी हंगामे की भेंट चढ़ गया था। अब 27 जुलाई से लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू होगी। माना जा रहा है कि सरकार और विपक्ष दोनों ही नए सिरे से अपनी रणनीति के साथ सदन में उतरेंगे। सरकार जहां पेपर लीक रोकने के लिए नए विधेयक को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।


केंद्र सरकार सोमवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करने की तैयारी में है। सरकार का उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा में धांधली रोकने के लिए सख्त प्रावधान लागू करना है। विधेयक में पेपर लीक मामलों में सजा बढ़ाने, जुर्माने की राशि बढ़ाने, दोषी परीक्षा एजेंसियों पर कार्रवाई और फास्ट-ट्रैक अदालतों के माध्यम से जल्द सुनवाई जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।


प्रस्तावित कानून में पेपर लीक या अनुचित साधनों में शामिल लोगों के लिए न्यूनतम सजा तीन से पांच साल और अधिकतम सजा 10 साल तक करने का प्रावधान है। इसके अलावा जुर्माने की सीमा भी बढ़ाने का प्रस्ताव है। संगठित अपराध में शामिल गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए भारी जुर्माने और लंबी सजा का प्रावधान रखा गया है। दोषी परीक्षा एजेंसियों को सार्वजनिक परीक्षाएं आयोजित करने से प्रतिबंधित करने और उनकी संपत्ति जब्त करने जैसे प्रावधान भी शामिल हैं।
वहीं विपक्ष ने भी अपनी रणनीति तैयार कर ली है। कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के दल संसद में छात्रों पर कथित पुलिस बल प्रयोग, प्रधानमंत्री से माफी की मांग, गृह मंत्रालय की जवाबदेही, सादे कपड़ों में मौजूद लोगों की भूमिका और शिक्षा क्षेत्र में बढ़ते खर्च जैसे मुद्दे उठाने की तैयारी में हैं। विपक्ष का कहना है कि केवल शिक्षा मंत्री का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।


विपक्ष पेपर लीक विरोधी विधेयक पर भी सरकार से विस्तृत चर्चा की मांग कर सकता है। विपक्ष का कहना है कि इतना महत्वपूर्ण कानून जल्दबाजी में पारित नहीं किया जाना चाहिए और सभी पक्षों से चर्चा के बाद ही इसे मंजूरी दी जानी चाहिए। दूसरी ओर सरकार का तर्क है कि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सख्त कानून जल्द लागू करना जरूरी है।


सरकार के एजेंडे में पेपर लीक विरोधी विधेयक के अलावा कई अन्य विधेयक भी शामिल हैं। इनमें महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक, विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश संख्या संशोधन विधेयक, आयकर संशोधन विधेयक, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक और एमएसएमई विकास संशोधन विधेयक प्रमुख हैं।
अब संसद के आगामी दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव के साथ-साथ महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा की संभावना है। पेपर लीक और शिक्षा से जुड़े मुद्दे युवाओं से सीधे जुड़े होने के कारण संसद में इन पर बहस तेज होने के आसार हैं। वहीं सरकार की कोशिश रहेगी कि सख्त कानून बनाकर परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल किया जाए।

