
ब्यरो रिपोर्ट

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz के बंद होने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। खासतौर पर घरेलू रसोई गैस (LPG) और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की उपलब्धता में भारी कमी देखने को मिल रही है। इस संकट से निपटने के लिए भारत की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां अब नए वैश्विक विकल्प तलाश रही हैं।


इस बीच Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum, Hindustan Petroleum और GAIL ने अफ्रीकी देश अंगोला की सरकारी कंपनी Sonangol से गैस खरीदने के लिए प्रारंभिक बातचीत शुरू कर दी है। यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए अहम माना जा रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य के अवरुद्ध होने से भारत का लगभग 90 प्रतिशत LPG आयात प्रभावित हुआ है। आपूर्ति संकट को देखते हुए सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। इसके तहत अब शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण इलाकों में 45 दिन के अंतराल पर ही गैस सिलेंडर बुकिंग की अनुमति दी गई है।


संकट उस समय और गहरा गया जब कतर के Ras Laffan पर हमलों के बाद QatarEnergy ने ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित कर दिया। इसके बाद Petronet LNG ने भी अपने उपभोक्ताओं के लिए इसी तरह के कदम उठाए, जिससे गैस आपूर्ति और बाधित हो गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अंगोला के साथ समझौता होता है, तो यह पहली बार होगा जब यह देश भारत को LPG की आपूर्ति करेगा। भारत लंबी अवधि के अनुबंधों पर जोर दे रहा है, जिसमें LPG के लिए एक साल और LNG के लिए कम से कम दस साल की डील शामिल हो सकती है। इससे आपूर्ति की स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

भारत फिलहाल अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। देश अपनी लगभग 60 प्रतिशत LPG जरूरतें आयात से पूरी करता है, जबकि प्राकृतिक गैस की कुल मांग का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा LNG आयात के जरिए पूरा किया जाता है। इस आयात का बड़ा हिस्सा कतर और यूएई जैसे पश्चिम एशियाई देशों से आता है।

अंगोला पहले से ही भारत के लिए एक अहम ऊर्जा साझेदार रहा है। वित्त वर्ष 2025 में यह भारत का पांचवां सबसे बड़ा LNG आपूर्तिकर्ता था। इसके अलावा भारत ऑस्ट्रेलिया, अल्जीरिया और रूस जैसे देशों से भी वैकल्पिक आपूर्ति के रास्ते तलाश रहा है, ताकि भविष्य में किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम की जा सके।
भारत और अंगोला के संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं। भारत ने अंगोला की आजादी की लड़ाई में समर्थन दिया था और 1985 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित हुए। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग लगातार गहरा हो रहा है, जो मौजूदा संकट के समय भारत के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।

