हरिद्वार: 2027 अर्धकुम्भ को ‘कुम्भ’ घोषित करने पर अशोक त्रिपाठी ने जताई आपत्ति

हरिद्वार: 2027 अर्धकुम्भ को ‘कुम्भ’ घोषित करने पर अशोक त्रिपाठी ने जताई आपत्ति

स्थान : हरिद्वार

ब्यरो रिपोर्ट

उत्तराखंड सरकार द्वारा 2027 में होने वाले अर्धकुम्भ को ‘कुम्भ’ के रूप में मनाने के निर्णय पर विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मेला उपाध्यक्ष अशोक त्रिपाठी ने इस फैसले पर गहरी आपत्ति जताई है।

प्रेस क्लब हरिद्वार में मीडिया से बातचीत के दौरान अशोक त्रिपाठी ने कहा कि यह निर्णय अध्यात्म और परंपरा के खिलाफ है। उनका कहना है कि हरिद्वार की अपनी पौराणिक और सनातन पहचान है, जिसे कृत्रिम या राजनीतिक आयोजनों से नहीं बदला जा सकता।

त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि सरकार तीर्थाटन (Pilgrimage) की बजाय पर्यटन (Tourism) को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों में पर्यटन को बढ़ावा देने से तीर्थों की मर्यादा और पवित्रता पर असर पड़ सकता है।

उन्होंने विशेष रूप से प्रदेश में बढ़ते अपराधों, जैसे कि अंकिता भंडारी हत्याकांड, को पर्यटन को जरूरत से ज्यादा बढ़ावा देने और तीर्थों की मर्यादा कम होने से जोड़ा। उनके अनुसार, धार्मिक वातावरण में बदलाव समाज पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

अशोक त्रिपाठी ने चेतावनी दी कि इस निर्णय के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। उनका मानना है कि अर्धकुम्भ को ‘कुम्भ’ के रूप में घोषित करने से केवल धार्मिक वातावरण ही प्रभावित नहीं होगा, बल्कि संतो और पुजारियों का जीवन और सामाजिक व्यवस्था भी खतरे में पड़ सकती है।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए और धार्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए उचित योजना बनाई जाए। उनका कहना है कि प्रशासनिक फैसलों में जनता और धार्मिक समुदाय की राय को भी शामिल करना चाहिए।

राज्य में राजनीतिक और धार्मिक संतुलन बनाए रखने के लिए अशोक त्रिपाठी ने जनता और प्रशासन दोनों से अनुरोध किया कि अर्धकुम्भ आयोजन को केवल धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए और किसी भी तरह के राजनीतिक या पर्यटन उद्देश्यों को प्राथमिकता न दी जाए।