काशीपुर जिला अस्पताल में रेबीज का संकट: गरीब मरीज मजबूर, सिस्टम बेबस

काशीपुर जिला अस्पताल में रेबीज का संकट: गरीब मरीज मजबूर, सिस्टम बेबस

स्थान : काशीपुर
ब्यरो रिपोर्ट

काशीपुर जिला अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शन की किल्लत ने गरीब मरीजों और उनके परिवारों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया है। अस्पताल में मौजूद मासूम और वयस्क, जिन पर पागल कुत्तों का हमला हुआ, अब इलाज के लिए नहीं, बल्कि अपनी जान की भीख मांगने को मजबूर हैं।

डॉक्टर सीएमएस डॉ. संदीप कुमार दीक्षित ने मीडिया के सामने कहा कि अस्पताल में वैक्सीन की कमी है और बजट की अनुपलब्धता सबसे बड़ी बाधा बन रही है। हालांकि, सवाल यह उठता है कि जब जिम्मेदार अधिकारी मदद की गुहार लगा रहे हैं, तो देहरादून में बैठी सरकार चुप क्यों है।

अस्पताल के हालात भयावह हैं—कभी 120, तो कभी 200 मरीज हर दिन रेबीज के खतरे में अस्पताल पहुंच रहे हैं। गरीब परिवार चार-चार और पांच-पांच लोगों के समूह बनाकर चंदा इकट्ठा कर इंजेक्शन खरीदने को मजबूर हैं।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों की खामोशी भी सवालिया है। विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, महापौर दीपक बाली और सांसद अजय भट्ट सहित जिम्मेदार लोग समस्या के प्रति अनदेखा रवैया अपनाए हुए हैं।

विशेषज्ञ और स्थानीय लोग चेतावनी दे रहे हैं कि अगर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो काशीपुर में बड़ी अनहोनी होने की संभावना है। प्रशासन की यह उदासीनता और संसाधनों की कमी सीधे गरीबों की जान पर सवाल खड़ा कर रही है।

मरीज और उनके परिवार अब सरकारी व्यवस्था पर भरोसा खो चुके हैं। यह वही स्थिति है, जहाँ गरीब लोग ₹20 के पर्चे पर अपनी जिंदगी की सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं, और जिम्मेदार अधिकारी केवल बजट का रोना रो रहे हैं।

निष्कर्ष:
काशीपुर में रेबीज के बढ़ते मामलों और इंजेक्शन की कमी ने स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता को उजागर किया है। प्रशासन की तुरंत कार्रवाई और वैक्सीन की उपलब्धता ही हजारों मरीजों की जान बचा सकती है।